
वाराणसी. भारत सरकार की ओर से साल 2021 के गांधी शांति पुरस्कार (Gandhi Peace Prize) की घोषणा कर दी गई है. इस बार पुरस्कार के लिए गीता प्रेस (Gita Press) का चयन किया गया है. गीता प्रेस के ट्रस्ट की ओर से पुरस्कार के रूप में मिलने वाली एक करोड़ रुपए की राशि लेने से इंकार कर दिया गया है. गीता प्रेस सिर्फ सम्मान लेगी लेकिन पुरस्कार राशि नहीं.
गीता प्रेस के ट्रस्टी कृष्ण कुमार खेमका ने news18 से बातचीत में कहा कि चूंकि सौ वर्ष की परंपरा का पालन हो रहा है. हमारे महापुरुषों के बनाए मूल्यों की बात है. इसलिए ये कहना थोड़ा अतिशियोक्ति होगी कि अगर एक करोड़ में दो शून्य बढ़ा भी दिए जाएं तो भी गीता प्रेस ये राशि स्वीकार नहीं करेगी. महापुरुषों ने ये नियम बनाया था कि हमें किसी तरह का सम्मान और आर्थिक सहयोग नहीं लेना चाहिए.
सम्मान तो स्वीकार, लेकिन सम्मान राशि नहीं लेंगे
कृष्ण कुमार खेमका ने कहा कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, पीएम मोदी और सीएम योगी ने शांति पुरस्कार प्रदान किया है इसलिए उनके सम्मान का मान रखते हुए ट्रस्ट बोर्ड ने ये सम्मान तो स्वीकार कर लिया है लेकिन बीते सौ वर्षों में परंपरा के मुताबिक, धन की कोई भी राशि गीता प्रेस ने सौ वर्षों में कभी नहीं ली. इसलिए संस्कृति मंत्रालय के सचिव को सूचित कर दिया गया है कि हम सम्मान राशि नहीं लेंगे केवल सम्मान को स्वीकार कर लेंगे.
सावरकर और गोडसे को पुरस्कृत करने जैसा: कांग्रेस नेता जयराम रमेश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देना, सावरकर और गोडसे को पुरस्कृत करने जैसा है. जयराम रमेश के इस बयान पर अपनी बात रखते हुए ट्रस्टी कृष्ण कुमार खेमका ने कहा कि गीता प्रेस वैसे तो विवादों से हमेशा बचता रहा है. गीता प्रेस का कोई राजनीतिक क्षेत्र नहीं है. हम आध्यात्मिक राह पर चलते हुए सनातनियों को, धर्म की राह पर चलाने की इच्छा रखते हैं. कोई क्या कह रहा है, इस बात से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. हमें खंडन और मंडन में कोई रुचि रहती नहीं है.
भगवत प्राप्ति मनुष्य को हो जाए, यही हमारा लक्ष्य है
कृष्ण कुमार खेमका ने कहा कि हमारा कोई बिंदु नहीं है. हम अध्यात्म का ही प्रचार करते हैं. हमारे संस्थापक ने कहा कि भगवत प्राप्ति मनुष्य को हो जाए, यही हमारा लक्ष्य है. बता दें कि इस वक्त करीब 15 भाषाओं में गीता प्रेस का प्रकाशन और अनुवाद हो रहा है, जिसमे उर्दू भी शामिल है. उर्दू में अनुवाद के पीछे क्या कारण है, इस पर कृष्ण कुमार खेमका ने कहा कि गीता प्रेस का ये मानना है कि श्रीमदभागवत गीता किसी संप्रदाय की नहीं बल्कि जनकल्याण के लिए है. ये विलक्षण ग्रंथ है. इसलिए जितनी भाषाओं में इसका अनुवाद हम करा सके, उसका अनुवाद किया. विश्व की अन्य भाषाओं में भी इसका प्रचार करा सकें.
गीता प्रेस की स्थापना के सौ वर्ष पूरे हो रहे
कृष्ण कुमार खेमका ने कहा कि वर्तमान में भारत सरकार ऐसे लोगों को खोज खोज कर सम्मान कर रही है, जिन्होंने समाज को दिया है. गीता प्रेस की स्थापना के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस शताब्दी महोत्सव पर अनेक कार्यक्रम हो रहे हैं. कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल और राष्ट्रपति आ चुके हैं और इस अवसर पर प्रधानमंत्री के आने की बात गोरखपुर में चल रही है.
93 करोड़ पुस्तकों का प्रकाशन किया गया
गीता प्रेस महापुरुषों के सौ वर्ष के तप से यहां तक पहुंची है. सौ वर्ष में लगभग 93 करोड़ पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है और पूरे विश्व में इसका बांटा गया है. वस्तुत: हमारा भरोसा भगवान पर है. महापुरुषों के बनाए मूल्यों का पालन हो, यही हमारा प्रयास है. गीता प्रेस परिवार प्रधानमंत्री और सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करता है जो उन्होंने इस पुरस्कार के लिए चुना है.
.
Tags: CM Yogi Aditya Nath, Gandhi Peace Prize, Gita Press Gorakhpur, Pm narendra modi
FIRST PUBLISHED : June 19, 2023, 18:31 IST






