JEE Result 2023 : दीदी बिहार ज्यूडिशल सर्विस में रैंक वन तो भाई क्यों रहे पीछे, JEE में पाई सफलता

शिखा श्रेया/रांची. रविवार की शाम जेईई एडवांस 2023 का रिजल्ट घोषित हो गया. जिसके बाद रांची के अपूर्वा ओजस्वी ने ऑल ओवर इंडिया 1357 लाकर सफलता के झंडे गाड़े हैं. अपूर्वा ने कहा मैंने रांची के डीपीएस स्कूल से पढ़ाई की व लालपुर के फिटजी कोचिंग से जेईई एडवांस की कोचिंग की हैं. यह सफलता मेरे पूरे परिवार, कोचिंग और स्कूल के टीचर को समर्पित है. उनके सहयोग के बिना यह मुमकिन नहीं हो पाता.

अपूर्वा ने लोकल 18 को बताया, मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा मेरी बड़ी बहन रही. मेरी बहन बिहार ज्यूडिशल सर्विस में नंबर वन रैंक लाई थी. उनको देखकर मुझे काफी प्रेरणा मिली. मैंने सोचा अगर दीदी कर सकती है तो फिर मैं क्यों नहीं. दीदी ने कर दिखाया अब मेरी बारी है. हालांकि मुझे टॉप 500 के बीच आने की उम्मीद थी लेकिन मैं अपने इस रैंक से खुश हूं.

केमिस्ट्री के लिए एनसीईआरटी बेहद जरूरी
अपूर्वा बताते हैं, कई बार लोग मल्टीपल किताब पढ़ते हैं, लेकिन अन्य किताबों के साथ एनसीईआरटी पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. खासकर बात केमिस्ट्री की हो तो, फिर एनसीआरटी को नजरअंदाज करना घाटे का सौदा है.जितना हो सके उतनी बार एनसीआरटी के सवाल को हल करें.मैंने एग्जाम के पहले तक 25 से 30 बार केमिस्ट्री के एनसीआरटी को पढ़ा था.साथी फिजिक्स व मैथ के लिए जितना प्रैक्टिस किया जाए उतना बेहतर.

आगे बताते हैं, इस पढ़ाई के दौरान सबसे जरूरी होता है कंसिस्टेंसी और डेडीकेशन कई बार मार्क्स कम आते है, तो डिमोटिवेशन महसूस होता था. लेकिन इस दौरान मेरी दीदी मुझे बहुत सपोर्ट करती थी.वह कहती थी जो नहीं है उसके लिए शिकायत मत करो और जो है उसके लिए धन्यवाद कहो. साथी मेरे दोस्तों ने भी मेरी काफी मदद की, मेरे दोस्त आयुष ने मुझसे कहा था कि क्यों सोचे कि क्या होगा, कुछ नहीं होगा तो तजुर्बा होगा. यह कुछ लाइनें है जिसने पूरे जर्नी में मुझे डिमोटिवेट होने नहीं दिया.

दादी की तबीयत के चलते अंकल के घर हुए शिफ्ट
अपूर्वा बताते हैं, घर में मेरी दादी की तबीयत कई बार खराब रहती थी और यह काफी लंबे समय तक चलता था. इसलिए पढ़ाई बाधित होती थी. जिस वजह से मुझे पास में ही अपने अंकल के घर शिफ्ट होना पड़ा. मैं अंकल के घर में ही रह कर पढ़ाई किया सिर्फ खाना खाने घर आया करता था. इस दौरान मुझे माता पिता के साथ काफी कम समय बिताने को मिलता था. लेकिन यही संघर्ष था व मैंने पूरी ईमानदारी के साथ इसे पूरा किया.

अपूर्वा आगे बताते हैं कि मैं रात में ही दूसरे दिन के लिए टाइम टेबल बना लिया करता था और सुबह 5 बजे उठकर पढ़ने बैठ जाया करता था. सबसे पहले केमिस्ट्री काे रिवीजन करता था. हालांकि ये टाइम टेबल पूरी तरह फॉलो नहीं होता, लेकिन 80 से 90% तक फॉलो तो कर लेता था.

इस दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर रखी. सिर्फ व्हाट्सएप इस्तेमाल करता था वह भी दोस्तों और अपने टीचर से डाउट क्लियर करने के लिए. अन्य बच्चों को सलाह देते हुए अपूर्वा कहते हैं, डेडिकेशन और हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है, यह करना ही होगा. बस दो-तीन साल की बात है. इस वक्त को ईमानदारी से निभा लीजिए तो इससे पूरी जिंदगी रिग्रेट नही रहेगी.

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Author: Jagran Times

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