Ship Of Desert: ऊंट के लिए रेगिस्तान में अस्तित्व का मंडरा रहा खतरा, 300 ऊंटों के मालिक सुमेर सिंह भाटी ऊंट सरंक्षण को लेकर चिंतित

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प्रतापा राम/जैसलमेर. ‘रेगिस्तान के जहाज’ के रूप में अपनी पहचान रखने वाला ऊंट अब विलुप्त होने के कगार पर है. राजस्थान पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर साल ऊंटों की संख्या घट रही है. पशुपालन विभाग द्वारा पशुगणना 2012 की तुलना में 2019 में ऊंटों की संख्या में 34.69 फीसदी कमी हुई है. ऊंट पालकों का कहना है कि यदि इस दिशा में कुछ ठोस कदम नहीं उठाया गया तो कहीं ऊंट किताबों, कल्पनाओं और इंटरनेट पर ही न सिमट जाए. यह हालत तब है जब ऊंट के संरक्षण को लेकर राजस्थान सरकार ने 30 जून 2014 को इसे राज्य पशु घोषित किया था.
सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा राज्य पशु घोषित करने के बाद इनकी बिक्री और परिवहन पर अंकुश लगा दिया गया है. वही, पहले किसानों के लिए खेती और परिवहन का मुख्य साधन ऊंट था, लेकिन बदलते परिवेश के कारण इनकी जगह ट्रेक्टर और अन्य यातायात के संसाधनों ने ले ली है.

पानी की कमी ऊंटों को अपने चपेट में ले रही है

वर्तमान समय में ऊंट सिर्फ केमल सफारी और पर्यटकों के लिए आकर्षण के केंद्र तक सीमित रह गया है. वही, रेगिस्तान में पानी की कमी भी ऊंटों को अपने चपेट में ले रही है. भाटी ने बताया कि मेरे पास पूर्वजों की संपत्ति के रूप में 300 ऊंट है. उनके गाँव में लगभग 5000 ऊंट हैं. लेकिन ऊंटों से आमदनी की कमी और बिक्री में रोक की वजह से इनका लालन पालन संभव नहीं हो रहा है.

ऊंटों के सरंक्षण के लिए सरकार दे रही 10 हजार की सहायता
राजस्थान के राज्य पशु ऊंट के पालन को बढ़ावा देने के लिए ऊंट पालकों को 10-10 हजार रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है. ऊंटों के संरक्षण के लिए बीकानेर में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गई है. लेकिन भाटी ने बताया कि ये योजनाएं धरातल पर प्रभावी नहीं है. जब ऊंट पानी की कमी के कारण दम तोड़ रहे हो या फिर ऊंटों में फैल रही बिमारियां उनको काल का ग्रास बना रही है.

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FIRST PUBLISHED : June 19, 2023, 13:35 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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