वैज्ञानिकों के लिए हमेशा पहेली ही क्यों बना रहा केकड़ों का विकास?

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पृथ्वी पर जीवन के विकास ने हमेशा ही वैज्ञानिकों को चौंकाया है. पृथ्वी पर कई तरह के जीवजंतु पनपे कुछ महाविनाश में विलुप्त हो गए तो फिर कुछ नए विकास क्रम में पनपे. कुछ के बारे में जानकर हैरानी होती है कि ऐसे जीव आखिर बनना या विकसित होना संभव भी कैसे हुआ तो कइयो में ऐसी खासियतें भी की वे कठिन से कठिन हालात में भी जिंदा रहे लेकिन इन सब में एक जीव आज भी पहेली बना हुआ है. वह है केकड़ा. उसकी खासियत यह है कि वह कई बार विकसित हुआ है और उससे भी अजीब बात यह है यह बहुत ही लंबे समय से रहस्य ही बना हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

केकड़े का विकास हमेशा से ही उद्भव जीवविज्ञानियों और वर्गीकरण विज्ञानियों के लिए रोचक ही रहा है. केकड़ों के इतिहास का समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में यह नतीजा निकाला था कि पिछले 25 करोड़ सालों में केकड़ों का कम से कम पांच बार विकास हो चुका है. जबकि वे सात या उससे अधिक बार वे गायब हो चुके हैं. बार बार केकड़ों जैसे शरीर का विकास इतनी बार हुआ है कि इसे कार्सिनाइजेशन कहते हैं और ऐसा ना होने पर डी कार्सिनाइजेशन कहते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) केकड़े हर बार थोड़े ही बहुत ही बदलाव के साथ फिर से अस्तित्व में आते रहे. लेकिन ऐसा होता क्यों रहा यह एक रहस्य ही है. जबकि वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि ऐसा होते रहने की भी विकासक्रम में कोई भूमिका या योगदान जरूर होना चाहिए. आज दुनिया के कोने कोने में हजारों केकड़ों की प्रजातियां हैं, जिनमें कुछ मिलीमीटर से लेकर करीब 4 मीटर विशाल केकड़े शामिल हैं. और तो और इतनी विविधता और जीवाश्म रिकॉर्ड के कारण ये विकासक्रम के अध्ययन के लिहाज से भी आदर्श हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) केकड़े के सामान्य तौर पर चार जोड़ी पै होते हैं. कुछ तीन जोड़ी वाले भी केकड़े बताए जाते हैं लेकिन वे तकनीकी तौर पर केकड़े नहीं होते है, लेकिन केवल आकार के कारण केकड़े कहे जाते हैं. दोनों का ऊपरी ठोस खोल होता ह उनकी एक पूंछ होती है. दोनों के समान पूर्वज होते हैं. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के उद्भव विज्ञानी जोआना वोल्फ ने दो साल पहले प्रकाशित विशेलषण में यहबताते हुए कहा था कि दोनों प्रकार के केकड़ों मे विभाजन भी हमेशा स्पष्ट नहीं रहा. विकासक्रम में एक दो बार असल केकड़े विकसित हुए और कम से कम तीन बार दूसरी तरह के. उनका वर्गीकरण भी कई बार गलत हुआ जो की हमेशा से ही, और अब भी एक चुनौतीपूर्ण काम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) उनके विकास के समझना, कितनी बार वे विकसित हुए और क्यो ये सब जानकारी बहुत सारे सवालों के जवाब दे सकती है. इतना ही नहीं कई विशेषज्ञों का मानना है कि कार्सिनाइजेशन का भी कोई बहुत बड़ा उद्भव लाभ होना चाहिए. इस विषय पर पर्याप्त शोध ना होना भी एक कारण है कि ये सवाल अब भी अनसुलझे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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Author: Up Head Line

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