Pradosh Vrat 2023: सुकर्मा योग में गुरु प्रदोष आज, अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त में करें शिव आराधना, जान लें मंत्र, व्रत और पूजा विधि

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हाइलाइट्स

आज त्रयोदशी तिथि सुबह 08 बजकर 32 मिनट से कल सुबह सुबह 08 बजकर 39 मिनट तक है.
सुकर्मा योग: आज, सुबह से लेकर देर रात 02 बजकर 03 मिनट तक.
अभिजित मुहूर्त: 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक

आज 15 जून को आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत है. गुरुवार दिन के कारण यह गुरु प्रदोष व्रत है. आज प्रदोष व्रत के दिन सुकर्मा योग बना है, जो पूजा पाठ या मांगलिक कार्यों के लिए शुभ होता है. आज त्रयोदशी तिथि सुबह 08 बजकर 32 मिनट से कल सुबह सुबह 08 बजकर 39 मिनट तक है. कल त्रयोदशी तिथि​ सुबह में ही खत्म हो जा रही है, ऐसे में प्रदोष व्रत रखना आज सही है क्योंकि त्रयोदशी तिथि में प्रदोष पूजा मुहूर्त आज ही प्राप्त हो हो रहा है. आज गुरु प्रदोष की पूजा के लिए 2 घंटे का समय प्राप्त हो रहा है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं प्रदोष पूजा मुहूर्त, महत्व, व्रत और पूजन विधि.

प्रदोष व्रत 2023 शुभ मुहूर्त
आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: आज, गुरुवार, सुबह 08 बजकर 32 मिनट से
आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि का समापन: कल, शुक्रवार, सुबह 08 बजकर 39 मिनट पर
सुकर्मा योग: आज, सुबह से लेकर देर रात 02 बजकर 03 मिनट तक
शिव पूजा प्रदोष मुहूर्त: आज, शाम 07 बजकर 20 मिनट से रात 09 बजकर 21 मिनट तक
पूजा का अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: आज, शाम 07 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 36 मिनट तक

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प्रदोष व्रत 2023 सुबह के मुहूर्त
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 07 बजकर 08 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त: 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से दोपहर 02 बजकर 06 मिनट तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से दोपहर 03 बजकर 51 मिनट तक

शिव पूजा मंत्र
शिव जी की पूजा के लिए पंचाक्षर मंत्र बहुत ही अच्छा है. शिव पंचाक्षर मंत्र ओम नम: शिवाय सबसे सरल और अधिक प्रभावी माना जाता है.

प्रदोष व्रत और पूजा विधि
आज सुबह उठने के बाद नित्यकर्म से निवृत हो जाएं और स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें. उसके बाद हाथ में जल और पुष्प लेकर प्रदोष व्रत एवं शिव पूजा का संकल्प करें. प्रदोष व्रत की पूजा शाम को होगी, ऐसे में दिनभर फलाहार पर रहें. अन्न न ग्रहण करें. शिव भक्ति में समय व्यतीत करें.

व्रत रखने वाले व्यक्ति को दोपहर में नहीं सोना चाहिए. शाम को पूजा मुहूर्त में शिव मंदिर जाएं या घर पर ही महादेव की पूजा करें. सबसे पहले भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें. उसके बाद गाय के दूध से अभिषेक करें. फिर ओम नम: शिवाय मंत्रोच्चार करते हुए भोलेनाथ को बेलपत्र, सफेद चंदन, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, अक्षत्, शक्कर, धूप, दीप, शहद, नैवेद्य, फल, फूल आदि अर्पित करें.

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इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें. गुरु प्रदोष व्रत कथा को सुनें. शिव जी की आरती करें. उस दीपक को पूरे घर में लेकर जाएं. फिर भोलेनाथ से शत्रुओं पर विजय का आशीवार्द लें. मनोकामना पूर्ति के लिए शिव जी से प्रार्थना करें.

पूजा के बाद रात्रि जागरण करें. अगले दिन सुबह सूर्योदय पर स्नान ध्यान करें. पूजा पाठ करने के बाद अपनी क्षमता अनुसार दान करें. फिर पारण करके व्रत को पूरा कर लें.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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Author: Up Head Line

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