
परमजीत कुमार/देवघर. हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. आसाढ़ मास में प्रदोष व्रत 15 जून को रखा जाएगा. इस दिन गुरुवार पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष भी कहा जाता है. गुरु प्रदोष व्रत को सुख और समृद्धि को बढ़ाने वाला माना जाता है. इस दिन प्रदोष काल में भोलेनाथ व माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाएगी.
बैद्यनाथधाम के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल ने बताया कि प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर व्रत रखा जाता है. श्रद्धालु फलाहारी व्रत रख सकते हैं या मीठा भोजन कर भी व्रत कर सकते हैं. वहीं, शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. इस व्रत को करने से रोग, ग्रह, दोष, कष्ट, पाप आदि से मुक्ति मिलती है.
क्यों नहीं मान रहे उदया तिथि
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि आषाढ़ महीने की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 जून को सुबह 8 बजकर 54 मिनट से हो रही है. यह तिथि अगले दिन 16 जून को सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक रहने वाली है. यह पूजा प्रदोष काल यानी शाम में की जाती है, इसलिए उदया तिथि न मानकर 15 जून को प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 15 जून की शाम 07 बजकर 20 मिनट से रात 09 बजकर 21 मिनट तक है. ऐसे में पूजा के लिए आपको करीब 2 घंटे का समय मिलेगा. वहीं अमृत काल शाम 07 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 36 मिनट तक है. इस समय पूजा करना श्रेयस्कर माना जाएगा.
ऐसे करें पूजा
प्रदोष व्रत के लिए सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहन लें. फिर शिव जी को याद करके व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. वहीं शाम में शिव मंदिर जा कर दीया जलाएं. इस दौरान सच्चे मन से की गई कामना पूरी होगी. इस दिन भगवान शिव को गंगाजल और दूध से स्नान कराना चाहिए. साथ ही शिवलिंग पर चंदन, बेलपत्र, धतूरा, फूल, अक्षत, शहद अर्पित करें.
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FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 22:30 IST






