Gorakhpur News : गोरखपुर के गांधी आश्रम में युवाओं की बढ़ रही भीड़, खादी के कपड़ों से बनवा रहे कुर्ते

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रजत भट्ट/गोरखपुर. गोरखपुर में गांधी आश्रम शुरू से लोगों की पसंद और एक ऐतिहासिक पहचान के रूप में जानी जाती ह़ै. गोरखपुर के उर्दू बाजार में 1940 में इसकी शुरुआत हुई. हालांकि वहां पर अंग्रेजों के शासन के कारण ज्यादा दिन यह गांधी आश्रम टिक न सका. फिर से गोरखपुर के गोलघर में 1959 में इसे शुरू किया गया. अब यह वहीं पर मौजूद है. बुजुर्ग से लेकर युवा पीढ़ी के लोग इस दुकान के ग्राहकों में शुमार है . इसके कपड़े लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं.

गोरखपुर के गांधी आश्रम के मैनेजर अभिमन्यु सिंह ने बताया गांधी आश्रम के लिए कहा जाता है ‘खादी हाथ का कटा हाथ का बुना’ .इस खादी आश्रम से बुजुर्ग लोगों का एक खास लगाव है. लेकिन अब गांधी आश्रम से युवा पीढ़ी का भी जुड़ाव हो रहा है. उनके लिए भी गांधी आश्रम मे पैंट- शर्ट और रंग-बिरंगे कुर्ते पजामे का ऑप्शन रखा जा रहा है. गांधी आश्रम चाहता है युवा पीढ़ी के लड़कों का भी रोल गांधी आश्रम में दिखे. ताकि इसे और भी आगे बढ़ाया जा सके. इस दुकान में हमारे पास कॉटन के सफेद थान का दाम 280, 300, 350 कुर्ते 1300 पाजामे 900 के खादी के रंगीन थान 300, 350 तक के हैं.

प्रधानमंत्री से प्रेरित हो रहे युवा
गोरखपुर के गांधी आश्रम में युवाओं की बढ़ती डिमांड को देखते हुए अभिमन्यु सिंह ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री ने गांधी आश्रम की ब्रांडिंग शुरू की है. तब से युवाओं का कुछ ज्यादा ही रुझान देखने को मिल रहा है. खास करके कुर्ते पजामे की डिमांड इतनी बढी है कि हम लोगों ने भी कपड़ों में कई तरह के वैरायटी बढ़ा दिए. ताकि कुर्ते पजामे युवाओं को पहनने में अच्छे लगे. साथ ही पैंट शर्ट के कपड़ों का भी ऑप्शन है. उसे भी पसंद से युवा ले रहे हैं. वहीं गांधी आश्रम में रेशम, बारी, खादी इन चीजों को बंगाल से मंगाया जाता है, जबकि सूती, कॉटन का उत्पाद खुद ही किया जाता है.

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FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 20:27 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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