एक बम ब्लास्ट ने बदली भूपिंदर की जिंदगी, अब पूरा परिवार करता है रक्तदान

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उमेश शर्मा/चंडीगढ़: आपका किया हुआ रक्तदान किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान साबित हो सकता है, इसलिए कहा भी जाता है ‘रक्तदान महादान’. अमूमन लोग जिंदगी में 2-3 बार ही रक्तदान करते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रक्तदान को अपने जीवन का ही लक्ष्य बना लेते हैं.

विश्व रक्तदान दिवस के मौके पर हम आपको एक ऐसे रक्त दाता की कहानी बता रहे हैं, जिसकी सोच बम धमाके से बदल गई. चंडीगढ़ के भूपिंदर नागपाल अब तक 157 बार रक्तदान कर चुके हैं. हालांकि, उनके जैसे कई लोग रक्तदान करते हैं, लेकिन नागपाल की कहानी कुछ अलग है.

बम ब्लास्ट ने बदल दी जिंदगी
दरअसल, 1986 में श्रीगंगानगर में बम ब्लास्ट हुआ था. नागपाल तब वहीं पढ़ाई कर रहे थे. धमाके में कई लोग घायल हो गए, जिनका वहां के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा था. मरीजों को ब्लड की जरूरत थी. स्थानीय पुलिस शहर के बाजार में घायलों के लिए खून की अपील कर रही थी. नागपाल भी उसी बाजार में खड़े थे और वह सीधे अस्पताल में रक्तदान करने पहुंच गए. उसी दिन नागपाल ने ठान लिया कि वह किसी जरूरतमंद को खून की कमी से नहीं मरने देंगे. नागपाल 1987 में चंडीगढ़ आए और एक अंग्रेजी अखबार में काम करने लगे. वहां वे रक्तदाताओं के समूह में शामिल हो गए और जहां जरूरत होती वहां समूह के साथ जाते थे.

157 बार कर चुके रक्तदान
नागपाल अब तक 157 बार रक्तदान कर चुके हैं. वहीं, उन्हें पंजाब के राज्यपाल, रोटरी क्लब और पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा ट्राईसिटी की कई संस्थाएं भी उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं. भूपिंदर नागपाल के परिवार में उनकी पत्नी और बेटा भी रक्तदान करते हैं. उनका कहना है कि वह जब तक जिंदा हैं, इसी तरह रक्तदान करते रहेंगे.

Tags: Blood Donation, Bomb Blast, Chandigarh news, Local18

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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