
ऐसे कम ही लोग होते हैं, जिन्होंने स्कूल का मुंह देखा हो और किताबें उनके करीब ना हों, लेकिन फिर भी यदि आप अब तक हिंदी साहित्य की दुनिया से दूर हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि आपको नहीं पता कि शुरुआत कैसे हो, तो हम यहां आपको कुछ ऐसी किताबों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे आपको हिंदी साहित्य की दुनिया से जुड़ने और उसे करीब से समझने का मौका मिलेगा. हमारे बीच ऐसी कई कालजयी रचनाएं हैं, जिन्हें पढ़ा जाना बेहद ज़रूरी है और शुरुआत करने के लिए इनसे बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता. तो आइए जानते हैं, उन दस चुनिंदा उपन्यासों के बारे में जिन्हें यदि आपने अब तक नहीं पढ़ा है, तो उन्हें अपनी लाइब्रेरी का हिस्सा बनाइए और पूरा पढ़ जाइए…
किताबों की दुनिया बहुत ही खूबसूरत और अनोखी होती है, जो मनुष्य के जीवन पर गहरी छाप छोड़ती है. यदि किसी युग, देश और काल को समझना है, तो उस समय के साहित्य को पढ़ना बहुत है. हिंदी साहित्य ने एक से एक रचनाएं हमें दी हैं, जिनकी कहानियां सिर्फ कहानी ही नहीं कहतीं बल्कि पूरा का पूरा इतिहास बयान करती हैं, उस समय को समझने के लिए. सोशल मीडिया के इस शोर भरे समय में यदि आप डिजिटल सामग्री देखकर ऊब चुके हैं और हिंदी साहित्य को समझना चाहते हैं और किताबें पढ़ने की योजना बना रहे हैं या फिर ये समझ नहीं पा रहे हैं, कि शुरुआत कैसे हो, तो यही वो समय है जब आपको हिंदी साहित्य की इस मनोरम दुनिया में शामिल होना चाहिए.
यकीन मानिए किताबें सुकून का वो कोना हैं, जो हमारे भीतर उठने वाले कई सवालों का बड़ी सफाई और निडरता से उत्तर भी देती है. यदि आपने हिंदी साहित्य नहीं पढ़ा है, तो आपको इसे पूरी तरह से आजमाना चाहिए. हिंदी में सभी प्रकार की कहानियां हैं और इसकी एक बहुत समृद्ध साहित्यिक विरासत है. यहां हम आपको उन दस किताबों की सूची दे रहे हैं, जिन्हें अवश्य पढ़ना चाहिए. आइए जानते हैं उन किताबों के बारे में जो हिंदी साहित्य के इतिहास का हिस्सा हैं और जिनके जैसा कुछ दूसरा लिखा नहीं जा सका. फिर बात चाहे धर्मवीर भारती के गुनाहों का देवता की हो, फणीश्वर नाथ रेणू के मैला आंचल की हो, श्रीलाल शुक्ल के राग दरबारी की हो या फिर मुंशी प्रेमचंद के निर्मला की हो… ये ऐसी कई कालजयी रचनाएं हैं, जिन्हें पढ़ा जाना ज़रूरी है.
1)
गुनाहों का देवता : धर्मवीर भारती
गुनाहों का देवता धर्मवीर भारती द्वारा लिखा गया उपन्यास है. पत्रकार और प्राध्यापक होते हुए भी धर्मवीर भारती मूलत: साहित्यकार थे. हिंदी की सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तकों में यदि इस उपन्यास को शामिल किया जाए, तो इसमें कोई झूठ नहीं होगा. इस उपन्यास के कई संस्करण निकले और आज भी गुनाहों का देवता की मांग कहीं से भी कम नहीं हुई है, हालांकि डिजिटल और नये तरह के साहित्य ने ज़रूर इस उपन्यास के प्रारंभिक वर्षों की मांग को पीछे छोड़ा है, लेकिन हिंदी साहित्य में इसे सबसे लोकप्रिय उपन्यास कहना ही सही होगा, जिसे साहित्य प्रेमी आज भी ढूंढ ढूंढ कर पढ़ना चाहते हैं. इस उपन्यास में मनुष्य की भावनाएं एक भारी ज्वार की तरह उभरती हैं और पाठक उपन्यास शुरू करते ही उनमें बहने लगता है.
इस उपन्यास के बारे में स्वयं धर्मवीर भारती ने कहा था, “मेरे लिए इस उपन्यास का लिखना वैसा रहा है, जैसे पीड़ा के समय में पूरी आस्था से प्रार्थना करना.” पीड़ा और आस्था ने इस उपन्यास को एक कालजयी कृति बना दिया. ये उपन्यास एक प्रेम कहानी है, जो छात्र चंदर के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अपने कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. शुक्ला की बेटी सुधा से प्यार हो जाता है. कहानी समाज में व्याप्त प्रेम के बीच आने वाले जातिगत भेदभाव की भी बात करती है. प्रेम, आक्रोश और भ्रम का सुंदर वर्णन इस उपन्यास को अद्भुत बनाता है.
2)
मैला आंचल : फणीश्वर नाथ रेणू
लोकप्रिय उपन्यास ‘मैला आंचल’ फणीश्वर नाथ रेणू द्वारा लिखा गया है. हिंदी उपन्यास साहित्य में जिन चंद कृतियों ने युगांतर उपस्थित किया है, मैला आंचल उन्हीं में से एक है. 1954-55 में इस उपन्यास का प्रकाशन एक घटना की तरह था. इसकी कथाभूमि उत्तरी- बिहार का पूर्णिया अंचल है और कथाकाल आजादी के कुछ बरस बाद का. एक सामाजिक और राजनीतिक चेतनासंपन्न लेखक की हैसियत से फणीश्वरनाथ रेणु इसमें उस परिवर्तन को बेहद बारीकी से चित्रित करते हैं, जो आज़ादी के फलस्वरूप गांवों में आया और जो सिर्फ परिवेशगत ही नहीं , बल्कि भीतरी व्यक्ति के मनोजगत में भी घट रहा था. इसके लिए लेखक ने लोक संस्कृति, लोक-विश्वासों और लोगों के जीवनक्रम पर पड़ने वाले प्रभावों को गहरी आत्मीयता से उकेरा है. इसका समूचा कथावृत अपनी रोचकता और मर्मिकता में व्याप्त लोकरूपों को आत्मसात किए हुए है. रेणु की आंचलिक संलग्नता, उनकी रागात्मक कथादृष्टि और रचनात्मकता भाषा-शैली इस उपन्यास के पात्रों और परिवेश को पाठकीय अनुभव का जीवंत और अविस्मरणीय अंग बना देती है.
‘मैला आंचल’ में एक युवा डॉक्टर की कहानी है, जो अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद एक पिछड़े गांव को अपने कार्य क्षेत्र के रूप में चुनता है. जहां उसे ग्रामीण जीवन का पिछड़ापन, दुःख, अज्ञान और अंधविश्वास का सामना करना पड़ता है. कहानी का अंत एक सकारात्मक संकेत के साथ होता है, कि ग्राम-चेतना जाग्रत हो चुकी है.
3)
राग दरबारी : श्रीलाल शुक्ल
यदि आप एक व्यंग्य पढ़ना चाहते हैं, तो ‘राग दरबारी’ को अपनी लाइब्रेरी का हिस्सा ज़रूर बनाएं. और वो भी कोई हल्का-फुल्का व्यंग्य नहीं, बल्कि यह राग उस दरबार का है, जिसमें हम देश की आज़ादी के बाद पड़े हुए हैं. इस उपन्यास की कथा भूमि एक बड़े नगर से कुछ दूर बसे हुए गांव शिवपालगंज की है, जहां की ज़िंदगी प्रगति और विकास के समस्त नारों के बावजूद, निहित स्वार्थों और अनेक अवांछनीय तत्वों के आघातों के सामने घिसट रही है. उपन्यास में में शिवपालगंज की पंचायत, कॉलेज की प्रबंध-समिति और कोऑपरेटिव सोसाइटी के सूत्रधार वैद्यजी साक्षात् वह राजनीतिक संस्कृति हैं, जो प्रजातंत्र और लोकहित के नाम पर समाज में चारों ओर फल-फूल रही है.
यह एक ऐसा उपन्यास है जो गाँव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को उजागर करता है, कि किस तरह एक व्यक्ति अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिए गांव के स्कूल, ग्राम पंचायत और स्थानीय सरकारी कार्यालयों का उपयोग करता है. इस उपन्यास के लिए श्रीलाल शुक्ल को 1970 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. पहला संस्करण आने के बाद से अब तक इस उपन्यास को कई-कई बार प्रकाशित किया गया है. साथ ही इसका अनुवाद लगभग सभी भारतीय भाषाओं में किया जा चुका है.
4)
निर्मला : मुंशी प्रेमचंद
हिंदी के कालजयी लेखक मुंशी प्रेमचंद को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है. उनके सभी उपन्यास अपने आप में बहुत ख़ास हैं, जिनका पढ़ा जाना हर हिंदी साहित्य प्रेमी के लिए ज़रूरी हो जाता है. ‘निर्मला’ प्रेमचंद के उन्हीं उपन्यासों में से एक है. ये उपन्यास एक कम उम्र लड़की की अधेड़ उम्र के पुरुष के साथ शादी हो जाने और उसके बाद की कहानी कहता है. जिस समय में भारतीय साहित्य ऐसे गंभीर और साहसिक विषयों पर नहीं लिख रहा था, उस समय में एक ऐसे उपन्यास का लिखा जाना सचमुच ही दुस्साहस का काम था और ये दुस्साहस प्रेमचंद के अलावा कोई और कर भी नहीं सकता था. उन्होंने अपने उपन्यासों के माध्यम से समाज का हमेशा एक ऐसा कड़वा सच दिखाने की कोशिश की, जिस पर लोगों का ध्यान नहीं जाता था, लेकिन उनके उपन्यासों के बाद लोगों ने उस दिशा में सोचना शुरू किया.
बेमेल विवाह और दहेज प्रथा की मार्मिक कहानी इस उपन्यास को महिला केन्द्रित साहित्य के इतिहास में विशेष स्थान पर रखती है. एक औरत अपनी सभी इच्छाओं और ज़रूरतों को मार कर किस तरह से मजबूर होती है रिश्तों को निभाने के लिए इसका उपन्यास में मार्मिक चित्रण किया गया है.
5)
वोल्गा से गंगा : राहुल सांकृत्यायन
महापंडित राहुल सांकृत्यायन को भारतीय यात्रा वृतांत का जनक कहा जाता है. उनकी किताब ‘वोल्गा से गंगा’ 20 ऐतिहासिक लघु कथाओं का संग्रह है, जो 6000 ईसा पूर्व से शुरू होती है और 1942 में समाप्त होती है, जिसका अर्थ ये है, कि इसकी सारी कहानियां 8000 वर्षों की अवधि और लगभग 10,000 किलोमीटर की दूरी को तय करते हुए पाठक तक पहुंचती हैं. राहुल सांकृत्यायन का ये कथा-संग्रह हिंदी के कथा-साहित्य की धरोहर होने के साथ-साथ ज्ञान-विज्ञान की अन्य शाखाओं में इतिहास-भूगोल को बारीकी से समझने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है. ये किताब अपनी भूमिका में ही ऐतिहासिक महत्ता और विशेषता को प्रकट करती है.
इस संग्रह में मनुष्य की आदम अवस्था और उन कबीलों का चित्रण है, जिसमें रहते हुए वो अपना पेट शिकार करके भरता था. उस समय के समाज और हालातों का चित्रण करने के लिए राहुल सांकृत्यायन ने कल्पना का सहारा लिया है, लेकिन कहानियों में उस समय को बहुत करीब से देखा जा सकता है, जैसे सबकुछ हमारे आसपास ही घटित हो रहा हो.
6)
आषाढ़ का एक दिन : मोहन राकेश
‘आषाढ़ का एक दिन’ मोहन राकेश द्वारा लिखित एक बहुत ही प्रसिद्ध हिंदी नाटक है, जिसे पहला आधुनिक हिन्दी नाटक भी माना जाता है. नाटक का कथानक कालिदास और उनकी प्रेमिका मल्लिका के इर्द-गिर्द घूमता है. यह नाटक उत्साहपूर्ण है. नाटक में प्रेम की जटिलता पाठक को तभी प्रभावित करेगी, जब इसकी कहानी से कोई अपेक्षा न रखी जाए. इस नाटक को सर्वश्रेष्ठ नाटक होने के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया, साथ ही कई प्रसिद्ध निर्देशकों ने इसका मंच के लिए निर्देशन भी किया. निर्देशक मणि कौल ने इस पर एक फ़िल्म भी बनाई, जिसे सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था.
महाकवि कालिदास के निजी जीवन को यदि बहुत करीब से समझना है, तो इस नाटक को ज़रूर पढ़ना चाहिए, क्योंकि उन्हें समझने के लिए इससे बेहतर और कोई किताब नहीं. इस नाटक की कहानी कालिदास की कृति मेघदूतम् से प्रभावित है.
7)
काशी का अस्सी : काशीनाथ सिंह
संस्मरण ‘काशी का अस्सी’ काशीनाथ सिंह ने लिखा है, जिसे लेखक ने कहीं न कहीं वर्षों तक उस कथा को जीने के बाद गढ़ा और स्वयं से टकराए पात्रों से परिचित होने के बाद उसे पुस्तक में ढाला है. काशी का अस्सी में अस्सी घाट और वाराणसी से संबंधित कहानियां हैं. ये कहानियां 1990 के दशक की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था की ओर इशारा करती हैं, लेकिन जब हम आज के समय को देखते हैं, तो इस संग्रह की कहानियां आज के नजरिए में भी सटीक बैठती हैं. किताब को लेखक ने इतनी खूबसूरत भाषा में लिखा है, जिनसे कहानियों का सौन्दर्य और अधिक बढ़ जाता है.
काशीनाथ सिंह के इस किताब रूपी संस्मरण पर ‘मोहल्ला अस्सी’ नाम से फिल्म भी बनी है. हालांकि फिल्म में वो बात नहीं, जो किताब को पढ़ते हुए महसूस होती है. ये फर्क आप तब महसूस करेंगे, जब किताब को पढ़ने के बाद फिल्म देखेंगे.
8)
तमस : भीष्म साहनी
‘तमस’ आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभ एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की परंपरा के अग्रणी लेखक ‘पद्म भूषण’ भीष्म साहनी का लोकप्रिय उपन्यास है. इसकी कहानी को पांच दिनों में घटित होने वाली घटनाओं के इर्द-गिर्द बुना गया. उपन्यास में भारत के विभाजन की जो तस्वीरें उकेरी गई हैं वो दुर्लभ हैं. शायद ही कोई पुस्तक प्रेमी होगा, जो भीष्म साहनी के लिखे उपन्यास ‘तमस’ से परिचित न हो. इसकी कहानी में देश के विभाजन से पहले की सामाजिक मानसिकता और उसके बाद हुए भयानक सांप्रदायिक दंगों के क्रूर और घिनौने आख्यान को चित्रित करती है. इस उपन्यास पर फ़िल्म और दूरदर्शन धारावहिक भी प्रसारित हुआ था, जो लंबे समय तक काफी लोकप्रिय रहा. एक कथाकार के रूप में भीष्म साहनी पर यशपाल और प्रेमचंद की गहरी छाप रही. उन्होंने अपनी कहानियों में अन्तर्विरोधों एवं जीवन के द्वन्द्व और विसंगतियों से जकड़े मध्य वर्ग के साथ ही निम्न वर्ग की जिजीविषा व संघर्षशीलता को उद्घाटित किया, जो कि तमस में भी साफ तौर पर पढ़ने को मिलता है.
भीष्म साहनी आम आदमी के दु:ख और संघर्ष को अपने शब्दों से कभी ओझल नहीं होने देते थे. उन्होंने आज़ादी के साथ देश के बंटवारे के समय की भयानक क्रूरता देखी थी. भयंकर से भयंकर परिस्थिति के बीच से ज़िंदगी की वापसी के चमत्कार को उन्होंने अपनी रचनाओं में अलग-अलग तरीके से रेखांकित किया. देश का विभाजन उनके जीवन की सबसे बड़ी ट्रेजडी रहा, जिसे उन्होंने अपने उपन्यास ‘तमस’ में रेखांकित किया.
9)
आपका बंटी : मन्नू भंडारी
‘आपका बंटी’ मन्नू भंडारी का वो चर्चित उपन्यास है, जिसे उनकी बेजोड़ रचनाओं में शामिल किया जाता है. यह एक कालजयी उपन्यास है. इसकी कहानी 9 बर्षीय बच्चे ‘बंटी’ के दर्द को बयान करती है, जो अपने माता-पिता के तलाक का सामना कर रहा है. कहानी कई बार ऐसी दुनिया में ले जाती है, जो बेहद तकलीफदेह है. उपन्यास में एक छोटे बच्चे के द्वारा उसके सीमित दृष्टिकोण से अनेक तरह की समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया है. यह किताब एक बच्चे के दर्द का मार्मिक वर्णन करती है. उपन्यास को पढ़ते हुए कई बार कहानी को आगे पढ़ने का दिल नहीं करेगा, लेकिन बहुत भारी मन और बहादुरी के साथ इसे खत्म करने के बाद ऐसा लगता है, जैसे कोई युद्ध लड़ कर निकले हैं. एक 9 साल का बच्चा मां-पिता के अलगाव के चलते किन-किन परिस्थितियों का सामना करता उसका उपन्यास में मनोवैज्ञानिक तरीके से वर्णन किया गया है.
10)
पिंजर : अमृता प्रीतम
अमृता प्रीतम का उपन्यास ‘पिंजर’ पिंजर एक ऐसी लड़की के दर्द को बयान करता है, जो विभाजन के बात बेहद तकलीफदेह जीवन जीती है. कहानी पूरो और राशिद नामक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है. पूरो वो लड़की है, जिसकी शादी तय हो जाती है और वो अपने होने वाले पति से प्रेम में होती है, जिसे राशिद नामक व्यक्ति द्वारा अगवा कर लिया जाता है. बहुत कोशिशों के बाद जब वह राशिद के घर से अपने माता-पिता के पास भाग जाती है, तो उसका परिवार उसे अपनाने से मना कर देता है, क्योंकि सामाजिक तौर पर वह अपवित्र हो जाती है. पिंजर को भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि के खिलाफ लिखे गए सर्वश्रेष्ठ साहित्य में से एक माना जाता है. इसी नाम से एक फिल्म भी बनी, जिसने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता.
चिड़िया की तरह फुदकती हुई लड़की अचानक से समाज में किस तरह दूषित हो जाती है और अपनों के बीच ही अपवित्र मानी जाने लगती है, इस सच को समझना है तो अमृता प्रीतम के इस लोकप्रिय उपन्यास को पढ़ना बेहद ज़रूरी हो जाता है.
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FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 20:40 IST






