महाराजा जयसिंह ने दिया था ‘उलवर’ को ‘अलवर’ नाम, उनके राज में निशुल्क थी शिक्षा

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 पीयूष पाठक/ अलवर. अलवर के पूर्व महाराजा जयसिंह को आधुनिक अलवर का जनक माना जाता है. वर्तमान में अलवर की धरोहरें, सड़कें, उद्यान, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के विकास में उनका विशेष योगदान माना जाता है. पूर्व महाराजा जयसिंह का जन्म 14 जून 1882 को विनय विलास में हुआ था.अपहले अलवर का नाम उलवर था, लेकिन पूर्व महाराजा जयसिंह ने उसे अलवर का नाम दिलाया. उन्हें राजर्षि की उपाधि से विभूषित किया गया.महाराजा जय सिंह शासन में रहते 100 से अधिक कानून बनाए. इनमें 1908 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया, 1920 में ग्राम पंचायतों की स्थापना की. 1928 में उच्च न्यायालय की स्थापना की. साथ ही 1917 में जयेंद्र बैंक स्थापित किया. अलवर का जिला अस्पताल भी उन्होंने ही बनवाया.

अलवर में आजादी से पहले ही निःशुल्क शिक्षा

पूर्व महाराजा जयसिंह ने अलवर राज्य में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था भारत को आजादी से मिलने से पहले ही कर दी. अलवर के सबसे बडे कॉलेज राजर्षि कॉलेज की स्थापना भी 1 अक्टूबर 1930 को ही कर दी. उस दौरान अलवर राज्य में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तक निःशुल्क शिक्षा दी जाती थी.

बाल विवाह एवं मत्यु भोज पर पाबंदी लगाई

पूर्व महाराज जयसिंह ने 1920 में अलवर राज्य में बाल विवाह, बेमेल विवाह एवं विवाह और मृत्यु भोज पर होने वाली पिफजूल खर्ची पर पाबंदी लगा दी थी. वहीं 1917 में बच्चों के नशीले पदार्थों के सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया. इतना ही नहीं 1928 में राज्य में धर्म परिवर्तन पर पाबंदी लगा दी गई. उनके शासन में 1928 मे मिलावट करने वाले के खिलापफ कानून बनाया गया.

चौड़ी और समान्तर सडकों का निर्माण कराया

सहायक आचार्य डॉक्टर हंसराज सोनी ने बताया कि उन्होंने अलवर को आधुनिक तरीके से बसाने के लिए 1919 में अलवर नगर के सुनियोजित विकास की नींव रखी. उस समय शहर में पर्यावरणीय सड़कें बनाई गई, एक दूसरे से समांतर सड़कें बनाई गई. अलवर का वर्तमान गौरव पथ मोती डूंगरी से विजय मंदिर तक सीधी सड़क का निर्माण कर सुरक्षा के लिए दोनों तरफ रेलिंग लगवाई गई. वर्तमान में ये रेलिंग यूआईटी ने हटवा दी. अलवर में डाक, रेल सेवाओं, टेलीफोन और बिजली की शुरू कराई.

सरिस्का की स्थापना भी पूर्व महाराजा जयसिंह ने की. उन्होंने 1911 में वन्य जीव हिंसा पर अलवर राज्य में प्रतिबंध लगाया. वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास एवं उन्हें स्वच्छंद विचरण के लिए 1918 में सरिस्का वैली का निर्माण करवाया. अब यह सरिस्का अभ्यारण के नाम से पूरे देश में विख्यात है. उन्होंने 1921 में फोरेस्ट रेगुलेशन बनाया गया.

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Author: Up Head Line

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