पहले क्या आए- सरीसृप या फिर अंडे, इस पर क्या पता चला है वैज्ञानिकों को?

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पृथ्वी पर सरीसृप पहले आए या फिर अंडे यह सवाल जीवन के उद्भव के इतिहास के सवालों में से एक रहा है. इस विषय पर हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं को ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनसे यह पता चल रहा है कि सरीसृप, पक्षी और स्तनपायी जीवों के शुरुआती पूर्वज बच्चों को सीधे जन्म दिया करते थे. यह उस प्रचलित धारणा के विपरीत ही कथन है जिसके माना जाता रहा है एम्निओट्स, यानि वे रीढ़धारी जिनके भ्रूण अंडों की एक संरक्षित परत के अंदर विकसित होते थे, के उद्भव सफलता के पीछे का रहस्य कठोर अंडों का होना था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

नानजिंग और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओ ने 51 जीवाश्म प्रजातियों और 29 आज की प्रजातियों का विश्लेषण कर सभी प्रजातियों को ओविपैरस (ठोस या नरम खोल वाले अंडे देने वाले) या विविपोरस (बिना अंडे के सीधे बच्चे पैदा करने वाले) के दो समूहों में बांटा. पाया गया कि विविपारिटी और एस्टेंडेड एंब्रयो रिटेंशन (ईईआर) एम्निओटा की सभी उत्भव शाखाओं में देखने को मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) इसमें स्तनपायी प्रजातियां, पिडोसॉरिया (छिपकली और उनके संबंधी) और आर्कोसॉरिया (डायनासोर, मगरमच्छ और पक्षी) सभी शामिल हैं. ईईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जहां नवजात की मां बच्चों को अबने अंदर अलग अलग समयों तक रखती है जो कि उचित बचाव हालातों पर निर्भर करता है. नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित शोध ने प्रस्ताव दिया है कि ईईआर इन प्रजातियों का मूल सरंक्षण प्रणाली हुआ करती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) ब्रिस्टल के स्कूल ऑफ अर्थ साइंस के प्रोफेसर माइकल बेन्टन उद्भव यात्रा की वर्तमान धारणा के बारे में बताते हुए कहा किपहले टेट्रपॉड ने मछलियों के मीनपंखों से अपने हाथपैर जैसे अंग विकसित किए जिनका उभयचरों जैसा बर्ताव था. वे प्रजनन और खाने के लिए पानी के आसपास होने पर निर्भर थे, जैसा कि आज के मेंढक और सैलेमैन्डर्स होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons) एम्नीओट्स का आगमन 32 करोड़ साल पहले हुआ था जिसे एक बड़े बदलाव का संकेत था. एक पानी से सुरक्षित चमड़ी और पानी की हानि को नियंत्रित करने वाली प्रणाली के विकसित होने से ये जीव प्रजनन के लिए पानी की जरूरत से मुक्त हो गए. लेकिन एम्नीओटिक अंडे प्रमुख जो जिन्हें एक तरह का प्राइवेट पूल कह सकते हैं जिनमें सरीसृप विकसित होते थे और वे गर्म जलवायु से से सूखने के खतरे से मुक्त थे. इसी वजह से वे पानी से दूर जमीन के पारीस्थितिकी तंत्र में बढ़ने लगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) लेकिन इस परंपरागत नजरिए को चुनौती मिल रही है. शोध के प्रोजोक्ट लीडर और जीवविज्ञानी प्रोफेसर बाओयू जियांग ने अवलोकित किया है कि बहुत सी छिपकलियों और सांपों ने लचीली प्रजनन रणनीतियां दिखाई है जिसमें ओविपारिटी और विविपारिटी यानि अंडे देने या ना देने के बीच बदलाव करते रहे हैं. जीवाश्म प्रमाण भी दर्शाते हैं कि झुकाव बिना अंडों के बच्चे पैदा करने की ओर था. ऐसे बहुत से थे जिनमें इचथायोसॉरस और प्लेसिओसॉरस जैसे मीजोजोइक समुद्री सरीसृप भी शामिल हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

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Author: Up Head Line

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