नागौर जो कभी था द्रोणाचार्य का धनुष विद्या का केन्द्र, 25000 वर्ष पुराना है यहां का इतिहास

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कृष्ण कुमार / नागौर. नागौर जिसका जिक्र महाभारत काल से माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि नागौर कभी द्रोणाचार्य का धनुष विद्या का केन्द्र रहा है. जी हां नागौर का इतिहास राजस्थान की कई बड़ी रियासतों से पुराना और सुनहरा है. नागौर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि यह जंगल प्रदेश की राजधानी रहा है. राजस्थान के पश्चिमी भाग को जंगल प्रदेश के नाम से जाना जाता था.

नागौर के इतिहासकार जगदीश प्रसाद सोनी ने बताया कि नागौर का इतिहास 25000 वर्ष पुराना है. मेरे द्वारा शोध करने के आधार पर नागौर में कुछ ऐसे साक्ष्य मिले है, जिससे नागौर को महाभारत काल का समय से माना जाता है. उन्होंने ने बताया कि महाभारत के ही उद्योग पर्व अध्याय 54 के श्लोक 7 केे अनुसार उस समय का यह अहिच्छत्रपुर कौरवों के अधीन था.

नागौर का उल्लेख महाभारत में भी देखने को मिलता है

जगदीश प्रसाद सोनी ने बताया कि यहां पर कभी सरस्वती नदी का प्रवाह क्षेत्र नागौर था. उत्खनन करने पर यहां नागौर की भूमि से सीप और शंक प्राप्त होते है. नागौर का उल्लेख महाभारत में देखने को मिलता है. यहां के किले के बारे में कहा जाता है कि 4 शताब्दी में नांग वंशीय राजा ने इसे बनाया. इसका प्रमाण लाडनूं में मिले शिलालेख में मिलता है. इतिहासकार के अनुसार महाभारत के समय में अहिच्छत्रपुर गुरु द्रोणाचार्य का धनुष विद्या का केन्द्र रहा है. इसके साक्ष्य किले में बने धनुष विद्या केन्द्र को माना जाता है.

 एयर कंडीशन के रुप में पहचाना जाता था किला

उन्होेंने ने बताया कि नागौर में उस समय सोने के व्यापार में अग्रणी था. उस समय यहां हाथी दांत पर कला, पांडुलिपि और कई प्रकार के काम किए जाते थे. जगदीश सोनी बताते है कि नागौर का किला उस वक्त एयर कंडीशन के रुप में भी पहचाना जाता था और किले में गर्मी में यह ठंडा और सर्दियों में गर्म रहता था. इसी प्रकार से इसकी स्थापत्य कला का यह किला अनोखा उदाहरण है. न्यूज 18 इसकी पुष्टि नहीं करता है क्योंकि यह बाते इतिहासकार जगदीश सोनी की बताई गई है.

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FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 17:06 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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