
बेंगलुरु. कर्नाटक में हाल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान लिंगायत मुख्यमंत्री से जुड़ी एक टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ दायर एक निजी मानहानि शिकायत को यहां की एक अदालत ने खारिज कर दिया है. पूर्व और मौजूदा सांसदों एवं विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने सिद्धरमैया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 (मानहानि) और 500 (मानहानि के लिए सजा) के तहत दायर शिकायत मंगलवार को खारिज कर दी.
शंकर शेत और मल्लैया हिरेमठ द्वारा दायर निजी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान सिद्धरमैया ने एक पत्रकार की ओर से पूछे गए सवाल पर दिए जवाब के जरिये लिंगायत समुदाय को अपमानित किया था. कांग्रेस नेता से पूछा गया था कि क्या उनकी पार्टी सत्ता में आने पर किसी लिंगायत नेता को मुख्यमंत्री बनाएगी. जवाब में सिद्धरमैया ने कथित तौर पर कहा था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई एक लिंगायत नेता हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार में लिप्त होकर राज्य को काफी नुकसान पहुंचाया है.
राज्य में लिंगायत मुख्यमंत्रियों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार पर उनके कथित बयान को लेकर कर्नाटक के विपक्ष के नेता सिद्धारमैया के खिलाफ बीते 25 अप्रैल को मानहानि का मामला दर्ज किया गया था. कार्यकर्ता शंकर सैत ने इस संबंध में बेंगलुरु की मजिस्ट्रेट अदालत में एक निजी शिकायत दर्ज कराई थी. कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर मामले की सुनवाई 29 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी थी. इस संबंध में कांग्रेस नेता के खिलाफ चुनाव आयोग में एक शिकायत भी दर्ज कराई गई थी.
बीते 10 मई को हुए वाले विधानसभा चुनाव से पहले लिंगायत के मुख्यमंत्रियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने और राज्य को बर्बाद करने के बयान से विवाद खड़ा हो गया था. भाजपा ने इसे राज्य में एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बनाया और इसे पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी के जाने से हुए नुकसान को नियंत्रित करने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. लिंगायत युवा वैदिक लीगल सेल, जिसने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, उन्होंने दावा किया कि सिद्धारमैया ने लिंगायत समुदाय का अपमान किया और उसे बदनाम किया.
.
Tags: Karnataka, Siddaramaiah
FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 13:51 IST






