
सुमित भारद्वाज/पानीपत. आज के इस आधुनिक दौर में किसी बीमारी के इलाज के लिए हमारे पास कई संसाधन हैं . इलाज के लिए अस्पताल में डॉक्टर हैं. संयंत्रों के तौर पर आधुनिक मशीनें और अच्छी दवाइयां है . कुछ घंटों में हम बड़ी से बड़ी बीमारी का पता लगा लेते हैं और इलाज तुरंत शुरू भी हो जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आज से सैंकड़ों वर्ष पहले हमारे पूर्वज बीमारियों का इलाज कैसे करवाते थे. तो चलिए आज हम आपको एक ऐसे नायाब पत्थर के बारे में बताते हैं जिसका पानी पीने से बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज होने का दावा किया जाता है.
पानीपत में बनी बू अली कलंदर शाह की दरगाह पत्थरों के लिए काफी मशहूर है. दरगाह में 35 मुल्कों से लाखों जायरीन हर साल आते हैं और माथा टेककर आशीर्वाद लेते हैं. इसी दरगाह के अंदर सैंकड़ो वर्षों पुराना एक ऐसा पत्थर है जिसका नाम है जहर मोहरा. माना जाता है कि इस पत्थर का पानी पीने से जहर का असर खत्म हो जाता है . अगर किसी इंसान को कोई जहरीला जीव-जंतु काट ले तो इस पत्थर का पानी पीने से उसका जहर खत्म हो जाता है.दरगाह की सेवा करने वाले मोहम्मद रिहान बताते हैं इस पत्थर का पानी को पीने से शरीर की बीमारियां भी खत्म हो जाती हैं. बहुत से बीमार लोग अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बीमारियों से बचने के लिए यहां से पानी लेकर जाते हैं और इस पानी को पीने से ठीक हो जाते हैं. दूर-दूर से लोग इस पत्थर का पानी लेने के लिए भी आते हैं.
किसने और कब लगवाया था पत्थर
यह पत्थर नवाब मुकर्रम अली को जिन्नात ने उपहार में दिया था. नवाब मुकर्रम अली जहांगीर बादशाह के वजीर और कैराना के नवाब थे . नवाब मुकर्रम अली द्वारा जब जिन्नातो की लड़की को ठीक किया गया था. तो जिन्नातो ने ठीक होने के खुशी में नवाब मुकर्रम को ये पत्थर उपहार में दिया था. मुकर्रम अली द्वारा इस ज़हर मोहरा के पत्थर को यमुना के अंदर डाल दिया था और वहीं पर बु अली शाह कलंदर साहब ने इबादत की थी. नवाब मुकर्रम अली बू अली शाह कलंदर के मुरीद हुआ करते थे उन्होंने बु अली शाह कलन्दर से कहा था कि उन्हें अपने चरणों में रख लेना. फिर बू अली शाह कलंदर साहब ने उन्हें अपने चरणों में स्थान दे दिया था. जिसके बाद यह पत्थर पानीपत की कलंदर शाह की दरगाह में आया था.
पत्थर पर लोहे का जाल लगाने का रहस्य
बताया जाता है कि पत्थर की सुरक्षा को लेकर इसपर लोहे का जाल लगाया गया है . दरगाह में मौजूद लोग पत्थर तोड़कर अपने साथ ले जाने लगे थे. इसी वजह से पत्थर को सुरक्षित रखने के लिए इसके ऊपर लोहे का एक जाल लगा दिया गया है ताकि अब इसे कोई तोड़कर अपने साथ ना ले जा पाए. और ये पत्थर सुरक्षित रह सके.
.
FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 13:06 IST






