
Kumar Vishwas Famous Kavita: समकालीन कवियों में सबसे चर्चित कवि और रामकथा मर्मज्ञ कुमार विश्वास को लेकर युवाओं में खासा क्रेज देखने को मिलता है. युवाओं में सबसे ज्यादा पढ़े और सुने जाने वाले कवियों में डॉ. कुमार विश्वास प्रमुख कवि हैं. कवि सम्मेलनों में कुमार विश्वास की कविताएं सुनकर जहां लोग झूमते हैं वहीं हिंदी फिल्मों में उनके गीतों पर नौजवानों को थिरकते हुए देखा जा सकता है. उत्तर प्रदेश के पिलखुवा के रहने वाले कुमार विश्वास के देशभक्ति गीत जहां लोगों में जोश भरते हैं वहीं उनकी राम कथा सुनकर लोग भक्ति की गंगा में गोते लगाने लगते हैं.
कुमार विश्वास की शुरूआत असल में श्रृंगार रस के कवि के रूप में हुई थी. वे प्रेम पर कविताएं लिखते थे. कुमार विश्वास को मशहूर किया ‘एक पगली लड़की’ ने. 90 के दशक में ‘एक पगली लड़की’ ने ही कुमार विश्वास को शोहरत की ऊंचाइयों पर पहुंचया. इसी नाम से उनका पहला कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ.
कुमार विश्वास के करीबी लोग बताते हैं कि ‘एक पगली लड़की’ असल मायनों में कुमार विश्वास के जीवन की सच्ची घटना पर आधारित है. हापुड़ में एक लड़की के प्यार में पागल होकर कुमार ने यह कविता लिखी थी. इस कविता में प्यार है तो प्यार से दूर होने की तड़प को नजदीक से महसूस किया जा सकता है. आप भी इस कविता का आनंद लें और खोजे उस पगली लड़की को जिसने आपकी रातों की नींद चुराई और दिल का सकून उड़ा दिया-
एक पगली लड़की के बिन
अमावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है,
जब दर्द की काली रातों में गम आंसू के संग घुलता है,
जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं,
जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं,सब सोते हैं, हम रोते हैं,
जब बार-बार दोहराने से सारी यादें चुक जाती हैं,
जब ऊँच-नीच समझाने में माथे की नस दुःख जाती है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।
जब पोथे खाली होते है, जब हर्फ सवाली होते हैं,
जब गज़लें रास नही आती, अफसाने गाली होते हैं,
जब बासी फीकी धूप समेटे दिन जल्दी ढल जता है,
जब सूरज का लश्कर छत से गलियों में देर से जाता है,
जब जल्दी घर जाने की इच्छा मन ही मन घुट जाती है,
जब कालेज से घर लाने वाली पहली बस छुट जाती है,
जब बेमन से खाना खाने पर मां गुस्सा हो जाती है,
जब लाख मन करने पर भी पारो पढ़ने आ जाती है,
जब अपना हर मनचाहा काम कोई लाचारी लगता है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।
जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है,
जब दर्पण में आंखों के नीचे झाई दिखाई देती है,
जब बड़की भाभी कहती हैं, कुछ सेहत का भी ध्यान करो,
क्या लिखते हो दिन भर, कुछ सपनों का भी सम्मान करो,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं,
जब बाबा हमें बुलाते है, हम जाते में घबराते हैं,
जब साड़ी पहने एक लड़की का फोटो लाया जाता है,
जब भाभी हमें मनाती हैं, फोटो दिखलाया जाता है,
जब सारे घर का समझाना हमको फनकारी लगता है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।
दीदी कहती हैं उस पगली लडकी की कुछ औकात नहीं,
उसके दिल में भैया तेरे जैसे प्यारे जज़्बात नहीं,
वो पगली लड़की मेरी खातिर नौ दिन भूखी रहती है,
चुप चुप सारे व्रत करती है, मगर मुझसे कुछ ना कहती है,
जो पगली लडकी कहती है, मैं प्यार तुम्ही से करती हूं,
लेकिन मैं हूं मजबूर बहुत, अम्मा-बाबा से डरती हूँ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ भी अधिकार नहीं बाबा,
सब कथा-कहानी-किस्से हैं, कुछ भी तो सार नहीं बाबा,
बस उस पगली लडकी के संग जीना फुलवारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।
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Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature
FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 11:38 IST






