
जितेंद्र कुमार/लखीसराय. मिठाई जिक्र होते हैं यह में रसगुल्ला का नाम सबसे पहले आता है. इसका नाम सुनकर ही जब से पानी टपकने लगता है और खाने के बाद तो मानो क्या आनंद आता है. रसगुल्ला पराया भारत के सभी जगहों पर आसानी से मिल जाता है. पर अलग-अलग जिलों में अलग-अलग वैरायटी में यह मिलता है. आज बात करेंगे ‘एटम बम रसगुल्ला’ की. इस एटम बम रसगुल्ले का शिकार हर कोई होना चाहता है. यहां का रसगुल्ला बिहार ही नहीं देश के कई कोनों में जाता है. कीमत भी काफ़ी कम है.
बिहार के रसगुल्ले नगरी नाम से प्रसिद्ध है बड़हिया
लखीसराय जिले का बड़हिया अपनी लजीज मिठाई की मिठास के लिए मशहूर है. बड़हिया का नाम आते ही जेहन में स्वादिष्ट रसगुल्ले की तस्वीर उभरने लगती है और मुंह पानी से भर जाता है. जैसे फलों का राजा आम है वैसे ही रसगुल्ला को मिठाई का राजा कहा जाता है. यहां के रसगुल्ले की डिमांड बिहार के साथ-साथ निकटवर्ती राज्यों में भी भरपूर है.
बिहार के लखीसराय जिले का छोटा कसबा बड़हिया रसगुल्ले की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. बड़हिया में अमूमन हर तरह के रसगुल्ले तैयार किए जाते हैं, लेकिन उन सभी में एटम बम नाम का रसगुल्ला काफी प्रसिद्ध है. स्वाद ऐसा कि बस खाते रहने का मन करेगा.
शुद्ध छेना, पतली चासनी और बिना मैदे के होता है तैयार
खास बात यह है कि आज भी यहां 130 से ₹200 किलो रसगुल्ला मिलता है. यहां के रसगुल्ले शुद्ध छेना, पतली चासनी और बिना मैदे के तैयार किए जाते हैं. इसके अलावा अन्य प्रकार का भी मिठाईयां यहां बनाई जाती है जैसे रसगुल्ला, रस मलाई, काला जामुन, क्रीम चाप मिठाई इत्यादि.
रसगुल्ला बनाने की विधि
रसगुल्ला को तैयार करने वाले कारीगर श्याम बताते हैं कि यहां दूध दियारा इलाके के आसपास के क्षेत्रों से लाया जाता है. वह लोग उससे छेना निकालते हैं. यहां के रसगुल्ले हल्के होते हैं. इसका वजह यह है कि छैना को भरपूर फेंटा जाता है. जिसके कारण छेना हल्का और मुलायम हो जाता है.
3000 लोगों को मिला है रोजगार
यहां रसगुल्ले की लगभग 100 से भी अधिक दुकानें हैं. प्रत्येक दिन लगभग 3 से 4 क्विंटल मिठाई की बिक्री होती है. इसे बनाने के लिए कारीगर और मजदूर भी लगते हैं. यहां प्रत्येक दुकान में लगभग 20 से 25 लोग काम करते हैं.
सस्ता है यहां का रसगुल्ला
बड़हिया में पिछले 30 वर्षों से मां शीतला भंडार का संचालन कर रहे मेघन सिंह ने बताया कि यहां भरपूर मात्रा में दूध की उपलब्धता है. डेयरी की जगह किसान खुद यहां दूध पहुंचा जाते हैं. इससे अच्छा दूध कम कीमत में मिल जाता है. जिसके कारण ग्राहकों को कम मूल्य में अच्छी गुणवत्ता वाली रसगुल्ला उनके द्वारा और पूरे बड़हिया के दुकानदारों के द्वारा मुहैया कराया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 21:48 IST






