OMG! अपनी बहन को नहीं बचा पाए तो ब्लड बैंक बनाकर बचा रहें सैकड़ों की जान, जानें मोतिहारी के अनिरुद्ध की कहानी

नकुल कुमार/पूर्वी चंपारण. कल यानी बुधवार को विश्व रक्तदाता दिवस है. इस दिन सभी को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. कहा जाता है ‘करके देखिए अच्छा लगता है’ लेकिन इस पूरे प्रकरण के बीच पूर्वी चंपारण के एक ऐसे रक्तवीर की चर्चा हर जुबान पर होती है, जिन्होंने 20 बार से ज्यादा तो स्वयं रक्तदान किया ही है. वही रक्तदान के लिए एक रक्तदाता समूह बनाकर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं. पर इसके पीछे एक बहुत दर्दनाक कहानी है.

बहन को बचाने के लिए नहीं दे पाए थे खून
बात 2017 की है जब मोतिहारी के अनिरुद्ध लोहिया अपनी बहन के इलाज के सिलसिले में चेन्नई के फोर्टिस हॉस्पिटल गए हुए थे. वहां उनकी बहन का हार्ट ट्रांसप्लांट होना था. जिसके लिए 40 यूनिट ब्लड की जरूरत थी. 25-26 यूनिट ब्लड वहां के स्थानीय लोगों ने डोनेट किया. जिनसे वे अनजान थे. वे भी ब्लड डोनेट करना चाहते थे, लेकिन घर के लोग चाहते थे की मैं अंतिम विकल्प के तौर पर ब्लड डोनेट करू. इच्छा रहने के बावजूद मैं ब्लड डोनेट नहीं कर पाया. मेरी बहन का देहांत हो गया और तब से यह बात मुझे भीतर से कचोटती रही कि मैं ब्लड क्यों नहीं दे पाया…?

2018 में पहली बार किया रक्तदान
बात 2018 की है जब उन्हें पटना से एक कॉल आया है कि मोतिहारी पूर्वी चंपारण के किसी रमेश मुखिया का बेटा दिलीप कुमार थैलेसीमिया पीड़ित है और उसे ब्लड की सख्त जरूरत है. बहन को ब्लड ना देने का मलाल तो था ही इसलिए मैंने हां भर दी. बहन के देहांत के बाद मैंने पहली बार ब्लड डोनेट किया. उस बच्चे के पिता ने मेरा पैर पकड़ लिया.

आपके शहर से (पूर्वी चंपारण)

पूर्वी चंपारण

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रक्तदान समूह मोतिहारी की स्थापना
मेरी बहन का देहांत और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के पिता की पीड़ा ने मुझे भीतर से इतना झकझोर दिया कि मैंने 15 अप्रैल 2018 को 4-5 लोगों से एक ब्लड डोनर व्हाट्सएप ग्रुप की स्थापना की. धीरे-धीरे और भी लोग जुड़ते चले गए. इसकी संख्या आज 500 है. जिसमें 100 एक्टिव ब्लड डोनर है.

किसी को ब्लड डोनेट करने की प्रक्रिया
अनिरुद्ध लोहिया बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 55 वर्ष हो एवं वजन 50 केजी से ज्यादा हो वह ब्लड डोनेट कर सकता है. चाहे वह किसी भी ब्लड ग्रुप का क्यों ना हो जहां पुरुष 3 माह में एक बार तो वही महिलाएं 4 महीने में एक बार ब्लड डोनेट कर सकती हैं.

कैसे लोग होती है ब्लड की जरूरत
पूर्वी चंपारण के अपने अनुभव के आधार पर कहते हैं कि यहां अधिकांश थैलेसीमिया पीड़ित गर्भवती महिला एक्सीडेंटल एवं कैंसर मरीजों को ज्यादातर ब्लड की आवश्यकता होती है. इसी तरह के कॉल आते हैं. नेगेटिव ब्लड के लिए ज्यादा कॉल आते हैं क्योंकि नेगेटिव ब्लड ग्रुप जल्दी मिलता नहीं है, इसलिए लोग ज्यादा परेशान रहते हैं.

प्रतिदिन 40 से 50 कॉल आते हैं
अनिरुद्ध बताते हैं कि ब्लड के लिए दिन भर में 40 से 50 कॉल आते हैं, लेकिन ब्लड डोनेट करने से पहले हम इसकी जांच पड़ताल करते हैं. डॉक्टर द्वारा ब्लड चढ़ाने के लिए सुझाव दिया गया है. अथवा नहीं यह सब देखते हैं कि उन्हें कितने ब्लड की जरूरत है. यदि 1-2 यूनिट ब्लड की जरूरत है तो सबसे पहले उनके परिवार के लोगों को ब्लड डोनेट करने के लिए मोटिवेट करते हैं.

14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस पर कैंप का कर रहे हैं आयोजन
14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर दिन के या 11:00 बजे से रक्तदान समूह मोतिहारी, मारवाड़ी युवा मंच एवं ब्लड डोनर ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन मोतिहारी के सदर अस्पताल ब्लड बैंक में किया गया है. इस विशाल रक्तदान शिविर के प्रायोजक उद्योगपति एवं समाजसेवी यमुना सिकारिया हैं.

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Author: Jagran Times

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