लंबे समय का तनाव दिमाग में कैसे पैदा करता है खाना खाने के लिए तलब

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कहते हैं जब इंसान ज्यादा तनाव में रहता है तो ज्यादा खाने की तलब में पड़ जाता है. यहबात नुकसानदेह नहीं लगती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने खोजा है कि लंबे समय का तनाव और सहूलियत वाला भोजन हमारे दिमाग में बदलाव की एक शृंखला बनाने लगते हैं. इन बदलावों से हम और ज्यादा खाने के लिए प्रेरित होते हैं, मीठा खाने की तलब बढ़ती है और इसके नतीजे में वजन बढ़ने लगता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

गार्वैन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक शोध समूह ने एक नवाचर अध्ययन में दर्शाया है कि कैसे लंबे समय के तनाव में दिमाग के पेट भरा हुआ महसूस करने की प्रतिक्रिया को खराब करने की शक्ति होती है. खास तौर पर वैज्ञानिकों ने दिमाग के खास हिस्से जैसे लेटरल हैबुनेला कहते हैं. सामान्य तौर पर जब यह क्षेत्र सक्रिय होता है तो यह खाने का रिवार्ड संकेतों का दबाने का काम करता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) अध्ययन के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर हर्बरर्ट हर्जोग का कहना है कि उनकी पड़ताल ने खुलासा किया है कि तनाव दिमाग की उस प्राकृतिक प्रतिक्रिया को खत्म कर देता है जिससे खाने से मिलने वाली खुशी कम हो जाती है यानि दिमाग लगाता खाने का पुरस्कार देता रहता है. शोधकर्ताओं ने दर्शाया कि कि हाई कैलोरी खुराख के लंबे समय का तनाव मिलकर लोगों में और ज्यादा खाने की तलब पैदा करता है और उसमे भी ज्यादा मीठा, खुश करने वाला खाना खाने की इच्छा होती है जिससे वजन और फिर मोटापा भी बढ़ता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock) न्यूरॉन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में सबसे हम नतीजा यही है कि तनाव के दौर में सेहततमंद खुराक कायम रखना बहुत महत्वपूर्ण है.शोधकर्तओं ने एक रोचक परिघटना की पड़ताल की जिसमें अधिकांश लोग तनाव होने पर ज्यादा खाने के लिए प्रेरित होते हैं और ज्यादा शुगर और फैटयुक्त अधिक कैलोरी वाले भोजन का चयन कर लेते हैं. ऐसा हर व्यक्ति के साथ नहीं होता क्योंकि तनाव में कुछ लोगों की भूख भी कम हो जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) इनके कारण जानने के लिए वैज्ञानिकों ने यह जानने का प्रयास किया कि लंबे समय के तनाव में दिमाग के अलग अलग हिस्से कैसे प्रतिक्रिया देते हैं. चूहों पर किए गए प्रयोगों के जरिए शोधकर्ताओं ने पाया कि दिमाग के ईनामी प्रतिक्रिया देने वाला हिस्से को बंद करने वाला हिस्सा लेटरल हैबेनुला चूहों में छोटी हाई फैट डाइट के समय ज्यादा खाने से रोकने के लिए सक्रिय रहता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) लेकिन जब चूहों को लंबे समय तक तनाव में रखा गया, दिमाग का यह हिस्सा शांत ही रहता था जिससे रिवार्ड संकेत सक्रिय रहते और चूहे ज्यादा खाने के लिए प्रोत्साहित होते रहते और भूख शांत करने के संकेतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आती थी. इससे चूहों का वजन बढ़ने लगा जिसका प्रमुख कारण न्यूरोपेप्टाइड वाय (एनपीवाय) अणु था. दिमाग इस अणु को तनाम की प्रतिक्रिया के तौर पर पैदा करता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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