
हाइलाइट्स
रेलवे ट्रैक पर एक ट्रेन को रास्ता देने के लिए दूसरी ट्रेन को जिस ट्रैक पर ले जाते हैं, उसे लूप लाइन कहते हैं.
रेलवे के नियमों के मुताबिक, कोई भी लूप लाइन 650 से 750 मीटर तक लंबी होती है.
लूप लाइन के कारण किसी भी पैसेंजर ट्रेन में 24 से ज्यादा डिब्बे नहीं होते हैं.
नई दिल्ली. भारतीय रेल का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है. हर दिन लगभग 2 करोड़ लोग रेलवे में सफर करते हैं. हालांकि, रेलवे अपने पैसेंजर्स की सुविधा का पूरा ध्यान रखती है और समय समय पर अपने तौर तरीकों में जरूरी बदलाव करती रहती है. क्या अपने ट्रेन में सफर करते हुए ध्यान दिया है कि किसी भी पैसेंजर ट्रेन में 24 से ज्यादा डिब्बे क्यों नहीं होते हैं?
बता दें कि कोई भी पैसेंजर ट्रेन कम से कम 3 डिब्बों के साथ भी सफर के लिए चल पड़ती है लेकिन इनमें कभी भी 24 से ज्यादा डिब्बे नहीं होते हैं. कई लोग इसे इंजन की क्षमता से जोड़कर देखते हैं लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे का असली कारण क्या है?
पैसेंजर ट्रेन में इसलिए नहीं होते 24 से ज्यादा डिब्बे
पैसेंजर ट्रेन में 24 से ज्यादा डिब्बे नहीं होने की वजह इतनी सरल है लेकिन इस पर कभी कोई ध्यान नहीं देता है. अगर आपने कभी गौर किया होगा तो जब किसी ट्रैक पर 2 ट्रेनें आमने सामने आती है तो उनमें से एक ट्रेन को कुछ देर के लिए दूसरी पटरी पर खड़ा करके दूसरी ट्रेन को रास्ता दिया जाता है. दरअसल, इस ट्रेन को जिस पटरी पर खड़ा किया जाता है उसे लूप लाइन कहा जाता है और यही पैसेंजर ट्रेन में 24 से ज्यादा डिब्बे नहीं होने का कारण होती है.
लूप लाइन कैसे होती है 24 डिब्बों की वजह?
दरअसल, रेलवे में जिस ट्रैक पर ट्रेन आती-जाती है, उसे मेन लाइन कहा जाता है. वहीं बीच में कहीं-कहीं पर सामने वाली ट्रेन को रास्ता देने के लिए लूप लाइन होती है. रेलवे के नियमों के मुताबिक, कोई भी लूप लाइन 650 से 750 मीटर तक लंबी होती है. ऐसे में किसी भी पैसेंजर ट्रेन को लूप लाइन में आने के लिए इससे लंबा नहीं होना चाहिए. बता दें कि पर ट्रेन के एक कोच की लंबाई करीब 25 मीटर होती है. इस तरह 24 डिब्बों की लंबाई करीब 650 मीटर हो जाती है. इसलिए इससे लंबी ट्रेन को लूप लाइन में खड़ा नहीं किया जा सकता है.
40-50 डिब्बों वाली मालगाड़ी कैसे देती है रास्ता?
रेलवे ट्रैक पर चलने वाली गाड़ियों को उनकी प्रायोरिटी के अनुसार रास्ता दिया जाता है. जैसे किसी एक्सप्रेस या नॉन-स्टॉप ट्रेन को अपने गंतव्य तक जल्दी पहुंचना होता है. ऐसे में ट्रैक पर जो भी लोकल ट्रेन या मालगाडियां होती है, उन्हें लूप लाइन पर ट्रांसफर कर दिया जाता है. क्योंकि मालगाड़ियों के डिब्बों की लंबाई पैसेंजर ट्रेन के मुकाबले कम होती है. मालगाड़ियों में ज्यादातर डिब्बे 11 से 15 मीटर की लंबाई वाले होते हैं. इसलिए लूप लाइन पर 40 डिब्बों वाली मालगाड़ी को भी आसानी से खड़ा किया जा सकता है.
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FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 13:31 IST









