
सिद्धांत राज/मुंगेर : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला की शुरुआत 4 जुलाई से होने जा रही है. इसको लेकर राज्य सरकार ने मेले की तैयारी को लेकर जिला प्रशासन को निर्देश दे दिया है. डीएम नवीन कुमार ने सभी विभाग के वरीय पदाधिकारी के साथ कई बैठकें भी कर ली और सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सभी विभाग को निर्देश दे दिया है. लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है.
हर साल श्रावणी मेला 1 महीने तक चलता था. लेकिन इस वर्ष मेला 2 महीने तक चलेगा जो 4 जुलाई से आरंभ होकर 31 अगस्त तक चलेगा.वहीं इस पूरी व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने लोकल 18 की टीम कच्ची कांवरिया पथ पर पहुंची. सरकार द्वारा बनाया गया गोगाचक धर्मशाला जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा मिला: रास्ते में बनाए गए कांवर स्टैंड और सीमेंटेड कुर्सी कई जगहों पर टूटी नजर आई.
श्रावणी मेला शुरू होने में रह गया है महज 25 दिन
कांवरिया पथ पर पीएचईडी विभाग द्वारा लगाया गया सभी चापाकल खराब अवस्था में पड़ा हुआ है. कांवरिया के लिए बनाया गया शौचालय की स्थिति भी बदतर अवस्था में पड़ा मिला. जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है. सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गया है. जहां तक इन सभी को दुरुस्त करने की बात है तो कुछ नहीं हो सका है. जमीनी स्तर पर जिला प्रशासन का एक भी काम नहीं दिख रहा है. जबकि इस वर्ष दो महीने श्रावण मेला चलेगा. श्रावणी मेला शुरू होने में महज 25 दिन शेष रह गया है. इसके बाद भी जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है.
लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने जाते हैं बाबाधाम
बता दें कि हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण महिना श्रावण है. जिसमें भारत में रहने वाले लोग तो कांवर लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ के धाम जाते ही हैं, साथ ही अन्य देश के लोग भी बड़ी संख्या में बाबा को जलाभिषेक करने के लिए 110 किलोमीटर की लंबी यात्रा पैदल तय करते हैं.
श्रावण मास में हर दिन लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज के उत्तर वाहिनी गंगा तट से जल भरकर यात्रा प्रारंभ करते हैं और कई दिनों तक पैदल चलने के बाद बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचते हैं. राज्य सरकार और जिला प्रशासन कई करोड़ों रूपए खर्च करके सारी सुविधाएं कांवरिया को उपलब्ध कराते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 20:58 IST








