
अमित सिंह/प्रयागराज. पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अब एक अभिनव प्रयोग किया जाएगा. हमेशा से इलाहाबाद विश्वविद्यालय आईएएस पीसीएस की फैक्ट्री मानी जाती रही है. कुछ वर्षों के परिणामों को छोड़ दें तो यहां के विद्यार्थियों ने हर बार सकारात्मक परिणाम देकर अन्य प्रदेश और जिलों को चौंकाने का काम किया है. अब ऐसे में जिन विद्यार्थियों का चयन सिविल सेवा में होगा, उनका नाम उनके हॉस्टल के कमरे में लिखा जाएगा. इसका उद्देश्य यह है कि आने वाले छात्र इससे प्रभावित होकर पठन-पाठन में अत्यधिक रुचि लें.
सबसे ज्यादा आईएएस-आईपीएस देने वाले छात्रावासों में एयन झा, जीयन झा, पीसीबी और ताराचंद छात्रावास का नाम सम्मान से लिया जाता है. अब पीसीबी छात्रावास और केपीयूसी छात्रावास में कमरों के बाहर सफल हुए छात्रों का नाम लिखने का निर्णय लिया गया है. पीसीबी के अधीक्षक डॉ सुजीत कुमार सिंह ने बताया पीसीबी छात्रावास से वर्ष 2012 तक यूपीएससी में सफलता का क्रम बना था. चयनित होने वाले छात्रों की संख्या में कमी हो गई चेन की कड़ी टूटने से छात्रावासों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर माहौल नहीं बन पा रहा है.
नए सत्र से इस परंपरा की होगी शुरुआत
उन्होंने बताया कि छात्रों को प्रेरित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है, ताकि जब अंतेवासी अपने कमरे में प्रवेश करें तो पता चले कि जिन कमरे में वह रहे हैं वह कितना महत्वपूर्ण है. छात्रावास से चयनित 100 से अधिक आईएएस, आईपीएस और आईआरएस का रिकॉर्ड है पर वह किस कमरे में रहते थे, जिसकी जानकारी जुटाई जा रही है. नए सत्र से इस परंपरा की शुरुआत की जाएगी. केपीयूसी छात्रावास के अधीक्षक डॉ हौसला सिंह ने कहा कि केपीयूसी में वर्ष 2000 तक आईएएस आईपीएस बनने का क्रम देखा गया है.
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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 16:34 IST








