
कैलाश कुमार/ बोकारो. जून महीने के 43 डिग्री की गर्मी और तेज धूप में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से आए गणेश और सुधीर साइकिल पर खास खजूर के पत्तों से बनी झाड़ू की बिक्री करते हैं. गणेश रोजाना सुबह 9 बजे अपने गांव अर्शा से 100 किलोमीटर की दूरी तय कर बोकारो के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर झाड़ू की बिक्री करते हैं. झाड़ू विक्रेता गणेश ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि खजूर का झाड़ू बनाने के लिए सबसे पहले जंगल से खजूर के पत्ते तोड़ कर लाना पड़ता है. फिर पत्तों को इकठ्ठा कर बारीकआकार में काटा जाता है. खजूर के पत्तों को रस्सी से बांधकर बड़े-बड़े किले पर चीरा जाता है और फिर तैयार झाड़ू को तार से बांधकर बिक्री के लिए रख दिया जाता है.
गणेश ने बताया कि एक खजूर के झाड़ू का कीमत 20 रुपए है और एक दिन वह लगभग 30 से 40 पीस खजूर का झाड़ू बनाते हैं. जिसमें उनके परिवार के लोग और उनकी पत्नी नीलम का अधिक सहयोग रहता है. खजूर की बनी झाड़ू शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में खूब पसंद किया जाता है, क्योंकि खजूर का झाड़ू लंबे समय तक टिकाऊ माना जाता है. साथ ही झाड़ू के खराब होने पर इसे जानवरों के चारा के रूप में भी दे दिया जाता है.
झाड़ू खरीदने आए ग्राहक जियाउद्दीन ने बताया कि खजूर से बनी हुई झाड़ू की कीमत काफी कम है और आमतौर पर शहरों में बहुत कम मिलती है. खजूर के पत्तों से बनी झाड़ू प्रकृति के लिए भी अच्छी मानी जाती है. इससे पर्यावरण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है.
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FIRST PUBLISHED : June 09, 2023, 22:05 IST








