Opinion: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उभरे नये भारत की धमक से अभिभूत अमेरिका

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बीते एक हफ्ते में अमेरिका के तीन बयान ऐसे हैं, जिनसे आप समझ जायेंगे कि आज भारत का रुतबा क्या है और आगे क्या होने जा रहा है. पहला बयान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के शीर्ष अधिकारी कर्ट कैंपबेल का जिसमें वो कह रहे हैं कि “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत अब विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका’ निभा रहा है, और भारत के साथ साझेदारी हमारे लिए सबसे मजबूत संबंधों में से एक है, और हम चाहते हैं कि भारत अमेरिकी की दोस्ती और मजबूत हो.” दूसरा बयान व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी का जिसमें उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को लेकर उठाए गए एक सवाल पर ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा-“भारत एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है जो लगातार विकास कर रहा है. हम कहेंगे कि जिसे भी भारत में वाइब्रेंट डेमोक्रेसी से रूबरू होना है वो दिल्ली जाकर खुद इसे देखे.” तीसरा बयान अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन का है जिसमें उन्होंने कहा कि “दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए एक नई पहल (इंडस-एक्स) होगी जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी अपनी अमेरिकी राजकीय यात्रा में करेंगे.” दरअसल इंडस-एक्स भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को बढ़ाने के लिए प्रस्तावित एक रक्षा पहल है जिसमें रक्षा क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन के अवसरों को बढ़ावा देने और हाई-टेक सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम किया जाएगा.

कई नए क्षेत्रों में समझौतों की संभावना
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 24 जून के दरम्यान अमेरिका राजकीय यात्रा पर रहेंगे जिसमें मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फर्स्ट लेडी जिल बाइडन के अथिति होंगे. प्रधानमंत्री मोदी का ये दौरा बेहद खास होने वाला है क्योंकि इसमें दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण सौदे और आपसी सहयोग बढ़ाने वाले नए समझौते होंगे. दोनों देशो के मंत्रालय कई तरह के व्‍यापारिक, रक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जुडे़ समझौतों की तैयारी कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को एतिहासिक बनाया जा सके. भारतीय लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में लगने वाले अमेरिकी जेट इंजनों के भारत में ही निर्माण करने का बड़ा सौदा हो सकता हैं, आत्मनिर्भर भारत की सफलता के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि रक्षा उपकरण भारत में ही बने, इसीलिए भारत के लिए भी अमेरिकी सहयोग महत्वपूर्ण है. वहीं दूसरी तरफ 30 MQ-9 B आर्म्ड ड्रोन खरीदने की डील भी हो सकती है.

कांग्रेस में संबोधन
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस की एक संयुक्त बैठक को संबोधित भी करेंगे. स्पीकर केविन मैक्कार्थी ने 22 जून को प्रतिनिधि सभा और सीनेट की एक संयुक्त बैठक को संबोधित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को निमंत्रण दिया था जिसे मोदी ने स्वीकार कर लिया है. ये अमेरिका द्वारा किसी विदेशी नेता को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है. खुद मैक्कार्थी ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम की जानकारी देते हुए लिखा कि “प्रधानमंत्री मोदी को गुरुवार, जून 22 को कांग्रेस की एक संयुक्त बैठक को संबोधित करने के लिए आमंत्रित करना मेरे लिए सम्मान की बात है.”

कुछ समय पहले की स्थिति
कुछ दशक पहले भारत को अमेरिका इतनी तवज्जो नहीं देता था. ऐसे में सवाल यही है कि आखिर ये बदलाव आया कैसे! इसके पीछे वैसे तो कई कारण है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण दो वजहें है. अव्वल दुनिया में बढ़ता भारत का दबदबा, खासकर अर्थव्यवस्था में. वित्त वर्ष 2023 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है. 2014 में हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में 10वें नंबर पर थी, मगर आज 5वें नंबर पर हम आ गए हैं. जहाँ एक तरफ ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि भारत अगले कुछ सालों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली जी-20 अर्थव्यवस्था होगी तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली ने इस बदलते भारत का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि मोदी की लीडरशिप में भारत बदल गया है. इस बदलने से मतलब है कि अब एशिया और दुनियाभर में भारत की पूछ बढ़ने लगी है और आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का रोल बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है. अमेरिका भारत के इस बढ़ते कद से अभिभूत है. दरअसल चीन जिस व्यापारिक आक्रामकता से दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, उससे चिंतित अमेरिका भारत का सहयोग पाने के लिए लालायित है. दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका भारत आर्थिक मोर्चे पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और सीमा पर चाहें वो डोकलाम हो या लद्दाख की तरफ का इलाका, भारत जिस मजबूती से चीन के सामने खड़ा है, उससे अमेरिका की मित्रता की हसरतें और भी बढ़ गयी हैं. अमेरिका रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने तो यहाँ तक कह दिया कि दुनिया चीन को जोर-जबरदस्ती करने वाले और धमकाने वाले देश के रूप में देखती है.

मोदी के सशक्त नेतृत्व का कमाल
दूसरी बड़ी वजह प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व है. भारत अब किसी भी चुनौती को टालता नहीं है बल्कि उससे भिड़ता है. मोदी सरकार में शासन प्रशासन में “अनिर्णय लेने की स्थित” अब किसी भी स्तर पर पूर्ववर्ती सरकारों जैसी नहीं दिखती. इसके अतिरिक्त मोदी का व्यक्तिगत करिश्मा भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. जापान में जिस तरह बाईडेन मोदी से उनकी कुर्सी पर मिलने आये, वो दृश्य सारी दुनिया ने देखे. अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में मोदी की सक्रियता और करिश्में ने भारत के रुतबे को और बढाया है. ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए कुछ मौकों पर कूटनीतिक सामंजस्य और कुछ मौकों पर रणनीतिक दबदबा बनाना आसान रहा और कोई चुनौती ही नहीं आई. रूस यूक्रेन युद्ध को अमेरिका ने अपनी नाक की लड़ाई बना लिया और लगभग हर देश को इधर या उधर बाटने में सफल रहा लेकिन प्रधानमंत्री मोदी अपनी नीतिगत कुशलता के चलते इससे अछूते रहे. आज अमेरिका भारत का लोहा मानता है. बकौल कर्ट कैंपबेल “दोनों देशों में आज जो भरोसा और विश्वास है, वह एक दशक पहले नहीं था”.
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

Tags: America, Prime Minister Narendra Modi

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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