रोहतक में मौजूद है 6 हजार साल पुराना डेरा, भक्तों को चिमटे से दिया जाता है आशीर्वाद, जानिए कारण  

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धीरेन्द्र चौधरी/रोहतक. हमारा देश साधु-संतों और फकीरों की तपोभूमि है, हर चार कोस पर आपको आस्था के केंद्र नज़र आ जाता है. कुछ का इतिहास तो सदियों पुराना है. ऐसा ही एक तीर्थ स्थल है रोहतक का गोकर्ण डेरा. जहां पर कई प्राचीन शिवलिंग हैं. सैकड़ों साधु-संतों और फकीरों की समाधियां हैं. ऐसे संतों की जिन्होंने इस धरती पर तप किया और समाज को दिशा देकर पंचतत्व में विलीन हो गए. अकेले गोकर्ण डेरे में 50 से ज्यादा तपस्वी ऋषि मुनियों की समाधियां हैं, जिनकी रोज पूजा की जाती है. लोग यहां पर अपनी मन्नतें मांगने आते हैं. लोगों में ये आस्था है कि यहां जो भी सच्चे मन से मांगा जाता है वो ज़रूर पूरा होता है.

पहले यह स्थान एक तपोस्थली थी इसका निर्माण महंत लक्ष्मण पुरी जी ने कराया था.दीन-दुखियों की सेवा करना ही उनके जीवन का लक्ष्य था. भक्तों के बीच वे आज भी चिमटाधारी बाबा के नाम से विख्यात हैं और शायद यही कारण है कि आज भी यहां लोगों को चिमटे से आशीर्वाद दिया जाता है. हर साल 9 जनवरी को महंत लक्ष्मण पुरी महाराज जी की बरसी होती है. इस मौके पर भंडारे का आयोजन किया जाता है. सैंकड़ों की संख्या में लोग यहां भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने के लिए आते हैं. नवरात्रि पर भी यहां भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं.यह पर भस्म और फल प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है.

6000 साल पुराना है डेरे का इतिहास
डेरे के प्रमुख महंत महामंडलेश्वर कपिल पुरी महाराज ने बताया कि इस डेरा का इतिहास तकरीबन 6000 साल पुराना है. महंत शीतल पुरी और महंत विशम्बर पूरी ने इस पवित्र भूमि पर तप किया और उसके बाद डेरे की परंपरा निभाते हुए उनके शिष्यों ने इस स्थान की पवित्रता को कायम रखा. महंत शीतल पुरी और महंत विशंभर पुर की भी समाधि इस डेरे में हैं. डेरे में दूर-दूर से आने वाले भक्तों का तांता हमेशा लगा रहता है.

डेरा है आस्था का केंद्र
डेरे के प्रति लोगों की आस्था इस कदर है कि विदेश में रहने वाले लोग भी साल में एक बार यहां मत्था टेकने जरूर आते हैं. लोगों का मानना है कि यहां हर मुराद पूरी होती है. इस जगह पर असीम शांति है और जब भी वे यहां आते हैं उन्हें बेहद सुखद अनुभव महसूस होता है.

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FIRST PUBLISHED : June 09, 2023, 13:35 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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