
शैलेन्द्र सिंह
भोपाल. मध्यप्रदेश में साल के आखिरी में चुनाव होने हैं. चुनाव के पहले अब बीजेपी में टिकट को लेकर रणनीति बनने लगी है. इसके साथ ही मापदंड भी तय किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश में टिकट वितरण को लेकर सरकार और संगठन के द्वारा तीन अलग-अलग सर्वे कराए गए हैं. माना जा रहा है कि सर्वे के आधार पर ही मध्य प्रदेश बीजेपी में टिकट वितरण होगा. हालांकि, पार्टी अभी जमीनी स्तर पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगी हुई है. इसे लेकर वह हर वर्ग को साधने का प्रयास कर रही है.
दूसरी ओर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी कर रहे लोगों पर ध्यान देते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को 66 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, कांग्रेस को भी टिकट वितरण के बाद दावदारों में होने वाले असंतोष का डर सता रहा है, जिसे लेकर वह हर विधानसभा में उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क साधी हुई है.
क्या है सर्वे रिपोर्ट में ?
बीजेपी ने जो 3 अलग-अलग सर्वे कराए हैं, उनमें से लगभग 50 विधायकों की हालत खराब बताई गई है. माना जा रहा है कि तीनों सर्वे में जिन विधायकों की रिपोर्ट नेगेटिव है, पार्टी उनका टिकट काट सकती है. इससे लेकर पार्टी नेताओं में खलबली मचना स्वाभाविक है. कुछ पूर्व विधायक भी लगातार मैदान में सक्रिय हैं, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई बातचीत में यह तय किया गया है कि जो प्रत्याशी दो या तीन बार से लगातार चुनाव हार रहे हैं, ऐसे नेताओं पर पार्टी दांव नहीं लगाएगी.
सर्वे को लेकर शुरू हुई सियासत
बीजेपी के सर्वे को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है. बीजेपी प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा का कहना है कि पार्टी जो भी सर्वे कराती है, उसकी रिपोर्ट कुछ चुनिंदा नेताओं को ही दी जाती है. इस तरह की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती है. सोशल मीडिया पर जो सर्वे रिपोर्ट की बातें चल रही हैं, वह कांग्रेस के मीडिया सेल द्वारा फैलाया जा रहा झूठ है. इतना तय है कि पार्टी उन्हीं लोगों को टिकट देगी जिनकी जनता के बीच पकड़ है और जिनका सर्वे में नाम है.
दिग्गज मंत्रियों की स्थिति खराब?
कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हाफिज का कहना है कि भाजपा कितने भी चेहरे बदल ले, लेकिन परिणाम नहीं बदलने वाले हैं, क्योंकि प्रदेश की जनता कमल निशान से ही परेशान है. वैसे भी बीजेपी में कई दिग्गज मंत्रियों की स्थिति भी खराब है, ऐसे में क्या पार्टी उन मंत्रियों के टिकट काटेगी? बहरहाल देखना यह होगा कि दोनों ही पार्टियां टिकट वितरण के बाद उम्मीदवारों में होने वाले असंतोष से कैसे निजात पाती है.








