Success Story : लखीसराय का यह युवा पत्तल और प्लेट बनाकर बना आत्मनिर्भर, जानें कितनी हो रही कमाई

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


जितेंद्र झा/लखीसराय: करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान इसी कहावत चरितार्थ कर दिखाया है लखीसराय के अभिमन्यु चौक निवासी गौरव कुमार ने. जिनके जीवन में कई ऐसी परेशानी आई जिनसे वह न तो किंचित हुए और न ही भयभीत हुए. कठिन प्रण लेकर मन में साहस लेकर वह आगे बढ़े और अभी लखीसराय जिले में उन्होंने भोज में उपयोग होने वाले पेपर के पत्तल और प्लेट बनाना शुरू कर दिया. आज उनके पास सात मशीन है जो रोजाना करीब 1500 से 2000 पत्तल का निर्माण कर लेते हैं. लेकिन गौरव के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था.

दिल्ली में मेहनत मजदूरी की. पैसे की बचत नहीं होने पर घर वापस आए. नमकीन बनाने का काम शुरू किया उसमें जबरदस्त घाटा हुआ. एक बार फिर हिम्मत जुटाकर परिवार से आर्थिक मदद लेकर पत्तल और प्लेट बनाना शुरू किया. जो इनको सफलता के नए पायदान पर पहुंचाने का काम किया.

Success Story : प्राइवेट नौकरी छोड़ 7 कट्ठा में की खीरा की खेती, जानें हर महीने कितनी हो रही कमाई

संघर्ष और मेहनत के दम पर गौरव ने मुकाम किया हासिल
गौरव ने बताया कि अन्य लोगों की तरह वह भी 16-17 साल के उम्र में जीविकोपार्जन के लिए दिल्ली गए थे, लेकिन वहां कड़ी मेहनत करवाई जाती थी और उस हिसाब से पैसे नहीं मिल पाता था. अधिक पैसे कमाने के चक्कर में ओवरटाइम भी किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और अधिक थकान होने लगी. जिसके काम को छोड़ दिया और दिल्ली से वापस घर लखीसराय आ गए. यहां आने के बाद ठान लिया कि कुछ करना है और बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाना है. यहीं रहकर कुछ करेंगे.

बिहार आने के बाद मार्केटिंग लाइन में काम करना शुरू किया और सबसे पहले कम लागत में भीखाराम चंद्रमल भुजिया बनाने का कार्य शुरू किया, लेकिन यह व्यवसाय पूरी तरह से चल नहीं पाया और पूरी पूंजी डूब गई. जिसके बाद तनाव में रहने लगा. इसके बाद परिवार में चर्चा कर पत्तल और प्लेट बनाने का निर्णय लिया और इसमें सफलता हाथ लगी.

20 लाख सालाना है पत्तल और प्लेट के कारोबार का टर्नओवर
गौरव ने बताया कि पत्तल और प्लेट बनाने के लिए पूंजी की आवश्यकता थी. लेकिन लोन लेने का पक्षधर नहीं था. इसके बाद अपने परिवार वालों से हीं 8 लाख की पूंजी ली और सात मशीन खरीदकर पत्तल और प्लेट बनाने का काम शुरू कर दिया. मेहनत रंग लाई और रोजना 1500 से 2000 पत्तल औ प्लेट निर्माण कर रहे हैं. पत्तल और प्लेट लखीसराय के अलावा मुंगेर, शेखपुरा, मोकामा, जमुई सहित आस-पास जिलों में सप्लाई होती है. गौरव ने बताया कि वर्तमान में सालाना 20 लाख का टर्नओवर है.

इको फ्रेंडली पत्तल और प्लेट तैयार करते हैं गौरव
गौरव ने बताया कि हर माह 40 हजार से अधिक की कमाई हो जाती है. वहीं पत्तल और प्लेट बनाने के लिए 10 से 12 लोगों को रोजगार भी दिया है. उन्हें हर माह सात हजार सैलरी भी दी जाती है. गौरव ने बताया कि पत्तल और प्लेट दोनों पर्यावरण के अनुकूल है. इसको मिट्‌टी में डालकर आसानी से खाद बनाया जा सकता है. यह पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाता है.

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें