
नई दिल्ली: क्या अफगानिस्तान पाकिस्तान में तालिबानी शासन चाहता है? पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से होने वाली वार्ता में अफगानिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री ने मध्यस्थ बनने से इनकार कर दिया है. इस वजह से आतंकवादी संगठन और पाकिस्तानी सरकार के बीच होने वाली वार्ता होने के पहले ही टूट गई है. इसके बाद पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री ने अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को शरण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं. जिसके जवाब में अफगानिस्तान के तालिबान सरकार ने कहा है कि वह ऐसी खतरनाक लोगों को पाकिस्तानी सीमा से दूर बसाने की योजना बना रहे हैं.
पाकिस्तान में आतंक का पर्याय बन चुके आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और पाकिस्तान सरकार के बीच अफगनिस्तान में मौजूद तालिबान सरकार के कार्यवाहक आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे. इसके चलते आतंकवादी संगठन और पाकिस्तानी सरकार के बीच वार्ता की शर्तों पर निर्णय होना था. पाकिस्तान सरकार चाहती थी कि आतंकवादी संगठन हथियार डालकर वार्ता करे. जवाब में आतंकवादी संगठन ने कहा था कि वार्ता की शर्तें क्या होगी यह निर्णय आतंकवादी संगठन लेगा. आतंकवादी संगठन और पाकिस्तानी सरकार के बीच इस रस्साकशी के चलने के कारण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे सिराजुद्दीन हक्कानी ने सरकार और आतंकवादी संगठन दोनों के बीच गारंटर की भूमिका निभाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह वार्ता शुरू होने से पहले ही टूट गई.








