
हाइलाइट्स
अपने बेटे को खोजने के लिए, हेलाराम मलिक ने बालासोर की 230 किलोमीटर की यात्रा शुरू की.
हेलाराम के बेटे को गलती से मृत समझ लिया गया था.
उसे गलती से ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना के मृतक पीड़ितों के साथ रखा गया था.
कोलकाता: ओडिशा के बालासोर में गत दो जून को हुई ट्रेन दुर्घटना (Odisha Train Accident) ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. इस घटना में 278 लोगों की मौत हुई और 1000 से अधिक व्यक्ति घायल हुए. इस हादसे से जुड़ी तमाम घटनाएं और दर्दनाक कहानियां लगातार सामने आ रही हैं. एक जीवित बचे व्यक्ति के पिता ने एक दिल दहला देने वाली घटना साझा की है. हेलाराम मल्लिक ने कहा कि उनके बेटे विश्वजीत को गलती से मृत समझ लिया गया था और लाशों का ढेर उसके ऊपर रख दिया गया था.
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार अपने बेटे को खोजने के लिए हेलाराम मलिक ने बालासोर की 230 किलोमीटर की यात्रा शुरू की. उनके अथक प्रयासों ने उन्हें अपने बेटे को एक अस्थायी मुर्दाघर में जीवित खोजने के लिए प्रेरित किया जहां उसे गलती से ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना के मृतक पीड़ितों के साथ रखा गया था. इसके बाद हेलाराम ने अपने जवान बेटे को बहानागा हाई स्कूल के मुर्दाघर से बाहर निकाला और उसे कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल लाने से पहले बालासोर अस्पताल ले गए.
बिस्वजीत के हाथ-पांव में कई चोटें आई थीं और यहां एसएसकेएम अस्पताल की ट्रॉमा केयर यूनिट में उनकी दो सर्जरी हुई. पूरी घटना के बारे में बात करते हुए हेलाराम ने कहा ‘मेरा बेटा कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार हुआ और काम के लिए संतरागाछी से चेन्नई जा रहा था. लगभग 7.30 बजे, उसने मुझे फोन किया और बताया कि ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई है. मुझे बुलाने के बाद उसने होश खो दिया. उसने किसी और के फोन से फोन किया था और मुझे बताया था कि उसे बुरी तरह चोट लगी है और वह बेहोश हो गया था. उसे मरा हुआ समझकर लाशों का ढेर उसके ऊपर रख दिया गया, जब उसे होश आया तो उसने हाथ हिलाकर इशारा किया कि वह जिंदा है.’
उन्होंने आगे कहा ‘लोगों ने महसूस किया कि वह जीवित है और उसे अस्पताल ले गए. हम अपने बेटे की तलाश में गए क्योंकि उसने फोन किया और हमें दुर्घटना की जानकारी दी. अंत में मैंने उसे बालासोर अस्पताल में पाया.’ दुर्घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद दर्दनाक था क्योंकि वह अपने बेटे को हमेशा के लिए खोने वाले थे. उन्होंने कहा ‘यह घटना हमारे लिए बेहद दर्दनाक थी क्योंकि वह 2 साल बाद लौटा था, 15 दिन रुका और फिर चला गया.’
हेलाराम ने आगे कहा ‘वह दोबारा जाएगा या नहीं यह उसकी मर्जी होगी, एक पिता होने के नाते मैं उसे सिर्फ यही सलाह दूंगा कि वह न जाए. हम बहुत खुश हैं लेकिन उसके पैरों और हाथों को लेकर चिंतित हैं. पैसा मेरे लिए मायने नहीं रखता, मेरे लिए जो मायने रखता है वह है मेरा बेटा. मैंने अपने बेटे को ढूंढ लिया है और उसे कोलकाता वापस लाना सबसे महत्वपूर्ण है. CM ममता बनर्जी द्वारा प्रदान किया जाने वाला मुआवजा हमारे लिए बहुत मददगार होगा और मैं उनका आभारी हूं.’
बता दें कि 2 जून को बालासोर में बहानागा रेलवे स्टेशन के पास दो पैसेंजर ट्रेनों के पटरी से उतर जाने और एक ट्रेन के साथ पस में टकरा जाने के कारण यह हादसा हुआ था. दुर्घटना तब हुई थी. जब जब शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिससे कई डिब्बे बगल के ट्रैक पर पटरी से उतर कर चले गए. इसके बाद, यशवंतपुर से हावड़ा जा रही हावड़ा एक्सप्रेस, तेज गति से प्रभावित डिब्बों से टकरा गई, जिसके परिणामस्वरूप यह भयंकर हादसा हुआ.
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Tags: Odisha Train Accident, Train accident
FIRST PUBLISHED : June 07, 2023, 07:37 IST








