
पुनीत माथुर/ जोधपुर. एक ऐसे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी जिसने 48 डाकुओं को मार गिराया तो वही 150 से अधिक को गिरफ्तार किया और अंत में डाकू से मुठभेड़ में शहीद भी हो गए. जी हां हम बात कर रहे है शहीद एसपी ताराचंद की. जिनकी जयंती के मौके पर जोधपुर में शहीद ताराचंद सर्किल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
जोधपुर में पुलिस लाइन के पास स्थित है ताराचंद सर्किल यहां चौराहे को आकर्षक तरीके से सजाया गया था और शहर के गणमान्य लोग पुलिस महकमे के आला अधिकारी पुष्पांजलि करने पहुंचे. शहीद एसपी ताराचंद चौधरी की जयंती के मौके पर उन्हें याद करने और अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए सभी लोग यहां पहुंचे.
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ताराचंद चौधरी हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले थे उनका जन्म 6 जून 1913 को हुआ था. 1930 में लाहौर यूनिवर्सिटी से मैट्रिक पास हुए और जोधपुर स्थित सरदार इन्फैंट्री डिवीजन में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए. 1936 में बीकानेर रियासत ने उन्हें एसआई पद पर नियुक्त किया गया. 1944 में एसआई से पदोन्नत हुए निरीक्षक बने और 1948 में डीएसपी के रूप में क्रमोन्नत हुए. 1951 में आईपीएस के पद पर क्रमोन्नत होने के बाद उन्होंने भरतपुर ,चुरू,पाली, नागौर और जोधपुर जिलों में एसपी के रूप में कार्य किया.
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 48 डाकुओं को मार गिराया तो वहीं 150 से अधिक हो गिरफ्तार भी किया. 12 मार्च 1958 को जोधपुर जिले के बिलाड़ा तहसील के पास स्थित हरियाढाणा गांव में कुख्यात डाकू कल्याण सिंह के साथ उनकी मुठभेड़ हुई कल्याण सिंह समेत उसके गिरोह के 25 से अधिक को मौत के घाट उतार दिया गया लेकिन गोली लगने से एसपी ताराचंद चौधरी भी शहीद हो गए. उनकी इस बहादुरी के चलते प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में राष्ट्रपति पुलिस एवं फायर सर्विस मेडल फॉर गैलंट्री से सम्मानित किया.
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FIRST PUBLISHED : June 06, 2023, 18:51 IST








