Bihar Bridge Collapse: क्या एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने जा रही नीतीश सरकार?

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हाइलाइट्स

भागलपुर जिले में गंगा पर बन रहे पुल गिरने के मामले में एक्शन की तैयारी.
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया, कंपनी को भेजा शो-कॉज नोटिस.
14 महीने में ये दूसरी बार है, जब कंपनी राज्य सरकार की जांच में फंसी है.
पुल भागलपुर के सुल्तानगंज और खगड़िया के अगुवानी घाट को जोड़ता है.

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2014 में भागलपुर में जिस सुल्तानगंज-अगुवानी घाट के बीच गंगा नदी पर बन रहे फोर लेन पुल (Khagaria Aguwani Ghat-Bhagalpur Sultanganj Ganga Bridge) का शिलान्यास किया था, रविवार को उसका एक बड़ा हिस्सा गिर गया था. जाहिर है नीतीश सरकार की इसको लेकर काफी किरकिरी हुई. अब इसको लेकर राज्य सरकार एक्शन मोड में दिख रही है और ब्रिज गिरने के मामले में सरकार ने हरियाणा की एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को नोटिस भेजा है. इसके साथ ही खगड़िया डिवीजन के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को भी निलंबित कर दिया गया. बताया यह भी जा रहा है कि इसे ब्लैक लिस्ट में डालने की तैयारी भी की जा रही है. मगर इससे इतर हकीकत यही है कि आज भी इस कंपनी के पास कई बड़े ठेके हैं.

बता दें कि14 महीने में ये दूसरी बार है, जब हरियाणा की एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड कंपनी (SP Singla Construction Company Limited) राज्य सरकार की जांच में फंसी है. सरकार ने निर्माण एजेंसी को यह निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों के अंदर गंगा में गिरे पुल के मलबे को हटाए. राज्य सरकार ने बिहार राज्य पुलिस निर्माण निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज सक्सेना को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनसे यह पूछा गया है कि पुल कैसे गिरा? दोबारा यह घटना कैसे हुई?

पुल निर्माण कंपनी को नोटिस
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी को नोटिस देकर पूछा है कि बिहार सरकार इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट क्यों न कर दे. अगर कंपनी ने 15 दिनों के भीतर नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उसे सरकार की तरफ से ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है. इस बीच एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के दौरान कंस्ट्रक्शन कंपनी की तरफ से किए जा रहे कामों पर नजर ना रखने और अनियमितताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगा है. सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया है और पाइलिंग भी सवालों के घेरे में है.

आपके शहर से (पटना)

पुल के डिजाइन और गुणवत्ता में खामियां
जिला प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, पुल के डिजाइन और निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और डिजाइनर खामियां सामने आई हैं. उन्होंने बताया कि कंस्ट्रक्शन कंपनी नदी किनारे बनाने के लिए 150 फीट की ऊंचाई का इस्तेमाल नदी के बीच के लिए किया, जहां पानी आमतौर पर सबसे ऊंचे स्तर पर होता है. कंपनी को नदी के बीच में 200 फीट से ज्यादा पाए लगाने की जरूरत थी, जो इस मामले में नहीं था.

एसपी सिंगला कंपनी का अरबों का कारोबार
बता दें कि इसी तरह पिछले 14 महीने में दो पाइल बैक टू बैक चुके हैं. बीच नदी के बीच में 22 पिलर हैं, क्योंकि पाइल की गहराई भी 150 फीट गहरी है. इसलिए इन सभी था शिमला के नेतृत्व में एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी है जिसके दिल्ली और हरियाणा में रजिस्टर्ड ऑफिस हैं. कंपनी को 1996 में शामिल किया गया था और वित्तीय वर्ष 2022 की कुल संपत्ति लगभग ₹869 करोड़ से अधिक थी.

14 महीने में दूसरी बार सवालों के घेरे में कंपनी
यहां यह भी बता दें कि हरियाणा की एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खगड़िया भागलपुर पुल बनाया था. कंपनी गंगा नदी पर 1710 करोड़ रुपए का चार लेन निर्माणाधीन सड़क पर प्रोजेक्ट गिरने के बाद बिहार सरकार की जांच के दायरे में है. 14 महीने में यह दूसरी बार है जब कंपनी राज्य सरकार की जांच में फंसी है. यह पुल भागलपुर जिले के सुल्तानगंज और खगड़िया जिले के अगुवानी घाट को जोड़ता है.

दोबारा कार्य शुरू करवाने को लेकर उठे सवाल
पुल ध्वस्त होने के मामले जांच शुरू हो चुकी है और पथ निर्माण विभाग ने निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब देने को कहा है. लेकिन, पथ निर्माण विभाग के एडीशनल चिफ सेक्रेटरी प्रत्यय अमृत की जांच पर बीजेपी के साथ-साथ जेडीयू के विधायकों को भी भरोसा नहीं है. लिहाजा इसकी जांच किसी स्वतंत्र ऐजेंसी से कराने की मांग हो रही है. इसके साथ ही सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि जब पहली बार पुल टूटा तो जांच के आदेश के बाद किसके आदेश से दोबारा यहां काम शुरू किया गया था?

निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच की मांग
जाहिर है कहीं न कहीं इस पुल टुटने की घटना के बाद नीतीश सरकार सवालों के घेरे में है. जेडीयू के विधायक डॉक्टर संजीव कुमार के साथ बीजेपी भी इस जांच पर सवाल उठा रही है. पूर्व पथ निर्माण मंत्री व भाजपा विधायक नितिन नवीन ने कहा है कि जब पहली बार पुल गिरा तो उन्होंने ही जांच आदेश दिया गया था. उस जांच का क्या हुआ? फिर किसके आदेश पर दaबारा वहां काम शुरू किया गया? इसकी जांच स्वतंत्र ऐजेंसी से होनी चाहिए क्योकि दूध की रखवाली बिल्ली करेगी तो जांच का क्या हाल होगा, ये सब कोई समझ सकता है.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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