
पवन कुमार/रेवाड़ी.हिन्दू धर्म में गाय पूजनीय है और इसमें तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का वास होता है. हिन्दू धर्मग्रन्थों और वेदों में तो गाय को स्थान दिया ही गया है, देवों और महापुरुषों ने भी गाय का उत्तम बखान किया है. भगवान कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि धेनुनामस्मि कामधेनु अर्थात मैं गायों में कामधेनु हूं . पौराणिक कथाओं में कृष्ण भगवान और गाय के बीच प्रेम, सेवा से जुड़ी कई किस्से, कहानियों का जिक्र है..
भारत में गाय को भगवान का स्वरूप माना गया है . भले ही आज के समय में गौ संरक्षण के लिए कई योजनाएं और गौशालाएं चलाई जा रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की सबसे पहली गौशाला की स्थापना कहां की गई थी ? किसके कहने पर इस गौशाला का निर्माण करवाया गया था? आपको बता दें कि भारत की पहली गौशाला रेवाड़ी में बनाई गई है. और ये गौशाला स्वामी दयानन्द के कहने पर रेवाड़ी के शासक राव युधिष्ठिर सिंह ने बनवाई थी.
स्वामी दयानन्द सरस्वती ने किया था रेवाड़ी में प्रवास
रेवाड़ी शहर के नारनौल रोड़ स्थित कुतुबपुर रामपुरा में बनाई गई इस श्री दयानन्द गौशाला का निर्माण वर्ष 1879 में कराया गया था. उस वक्त रेवाड़ी के शासक राव युधिष्ठिर सिंह थे. कहा जाता है कि वर्ष 1879 में स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज ने 17 दिनों के लिए रेवाड़ी में प्रवास किया था. प्रवास के बाद जयपुर जाते समय उन्होंने रेवाड़ी के इस स्थान पर छड़ी मारकर जमीन की निशानदेही की थी कि यहां गौशाला बनाई जाए.
गोरक्षिणी सभा से पहले हुआ था गौशाला निर्माण
कहा जाता है कि वर्ष 1882 में पहली गोरक्षिणी सभा की स्थापना पंजाब में की गई थी . लेकिन ये गौशाला उससे भी पहले बना दी गई थी. अभी वर्षों से गायों के संरक्षण के लिए संस्थाएं काम कर रही हैं. विभिन्न सरकारों ने भी गौ संरक्षण के लिए योजनाएं बनाई लेकिन उस वक्त भविष्य को देखते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती ने रेवाड़ी के राजा से गौशाला की स्थापना कराई थी.
राव युधिष्ठिर सिंह के वंशज है बीरेन्द्र सिंह
राव युधिष्ठिर सिंह राजा राव तुलाराम के बेटे थे.राजा राव तुलाराम स्वतन्त्रता संग्राम के प्रथम युद्ध के नायक थे. जिनके वंशज हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेन्द्र सिंह थे. कहा जाता है कि उस वक्त रामपुरा रियासत हुआ करती थी. राजा राव तुलाराम की मौत के बाद वर्ष 1879 में उनके बेटे राव युधिष्ठिर सिंह उस समया राजा थे.
गौशाला आज भी है चालू
देश की प्रथम गौशाला में अभी करीबन 350 गौ वंश है. जिनके पालन पोषण के लिए एक कमेटी बनाई गई है. गौशाला के अंदर ही श्री कृष्ण जी का मंदिर भी बनाया गया है. साथ ही राजा राव तुलाराम और उनके वंशजों की याद में गौशाला के अंदर ही छतरी का निर्माण भी कराया गया है.
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FIRST PUBLISHED : June 06, 2023, 13:13 IST








