
अर्पित बड़कुल/दमोह: मध्यप्रदेश का दमोह खासतौर पर अतिकुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बुंदेलखंड के अन्य शहरों के मुकाबले बेहतर है. यही कारण है कि आसपास के कई बड़े शहरों के कुपोषित बच्चों के परिजन भी अपने बच्चों को यहीं लेकर आते हैं, ताकि जल्द से जल्द वे रिकवर हो जाएं.
दमोह बुंदेलखंड का वहीं जिला है जहां सुविधाओं के अभाव में मरीज बेहतर इलाज के लिए अक्सर जबलपुर, सागर, भोपाल और नागपुर जैसे शहरों के लिए चले जाते थे, लेकिन अब नई तकनीक, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और 48 घंटे डॉक्टरों की मौजूदगी के चलते बदलते दमोह की तस्वीरें सामने आ रही हैं.
यहां के अस्पताल ने कुपोषित बच्चों के इलाज में इतनी सुविधाएं जुटा ली हैं कि अन्य जिले सतना, पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ जिले तक के अतिकुपोषित बच्चों के परिजन उन्हें दमोह जिला अस्पताल में ही भर्ती कराते हैं,
अब बच्चे में है सुधार
डॉ. सुनील जैन ने बताया कि अभिराज अहिरवाल पिछले आठ-दस दिन से हमारे यहां भर्ती था जो कुपोषण की फोर्थ ग्रेड में आया था और उसके दोनों पैर में बहुत ज्यादा सूजन थी, जिसे भर्ती कर इन्वेस्टिगेट किया गया. नॉर्मली जो अतिकुपोषित बच्चों होते हैं उनमें प्रोटीन का लेवल बहुत ही नीचे गिर जाता है. इस बच्चे का प्रोटीन का लेवल भी 3 ग्राम से नीचे पहुंच गया था. जिसे मैनेज करना बहुत कठिन होता है. बच्चे को सीरोअलबोमिन का इंजेक्शन लगाया गया जो बहुत ही महंगा होता है जिसे विक्टोरिया हॉस्पिटल जबलपुर से मंगवा कर बच्चे को लगाया गया एक से दो डोज लगने के बाद बच्चे में काफी सुधार है.
बेहतर हैं सुविधाएं
डॉ. जैन का कहना है कि दमोह जिला अस्पताल में नई तकनीक के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हैं. पूर्व में जिले में कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की संख्या काफी थी, जिनका इलाज करने के बाद नर्सिंग स्टाफ भी पूरी तरह ट्रेंड है. यही कारण है कि ऐसे बच्चों को ठीक करने में दमोह जिला अस्पताल अन्य अस्पतालों से काफी आगे है.
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FIRST PUBLISHED : June 06, 2023, 00:40 IST








