नौरादेही में बाघों की भूख मिटाने के लिए आ रहे चीतल, चीतों का भी बनेंगे आहार

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अनुज गौतम/सागर: एमपी के सागर, दमोह और तेंदूखेड़ा जिले की सीमाओं में फैले नौरादेही अभ्यारण में बाघ प्रोजेक्ट सफल हो गया है. अभ्यारण में अभी तक करीब एक दर्जन वयस्क बाघ सहित 16 टाइगर हैं. जैसे-जैसे यहां टाइगर की संख्या बढ़ रही है, वैसे वैसे उनके आहार के लिए भी समस्या खड़ी हो रही है. ऐसे में नौरादेही अभ्यारण प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए हैं.

टाइगर के आहार के लिए यहां पर पेंच टाइगर रिजर्व से जल्द ही 450 चीतल की दूसरी खेप लाई जाएगी. इसको लेकर काम शुरू हो गया है. यह चीतल भविष्य में चीता का आहार भी बनेंगे. वहीं बाघों के शिकार के लिए नौरादेही वन परिक्षेत्र में अभी चीतल के अलावा चिंकारा नीलगाय भी हैं. जबलपुर एसएफआरआई की सर्वे रिपोर्ट में चीतल की संख्या बढ़ने का भी दावा किया गया है.

यहां बाघों के लिए भरपूर शिकार
इसके पहले 2019 में भी 750 से अधिक चीतल की एक खेप नौरादेही अभ्यारण में छोड़ी गई थी. नौरादेही अभ्यारण के डीएफओ डॉक्टर एए अंसारी ने बताया कि अभ्यारण के अंतर्गत शिकार बेस बढ़ाने के लिए साल 2016-17 से प्रयास किए जा रहे हैं. इसमें दो तरह से लाभ मिल रहा है. एक तो ग्राम का जो विस्थापन हो रहा है, उसको चारागाह में तब्दील कर रहे हैं और जो चीतल पेंच टाइगर रिजर्व से बुलवाए जा रहे हैं, उनकी संख्या में वृद्धि देखने को मिल रही है. पेंच टाइगर रिजर्व से नौरादेही में अभी 450 चीतल और आने हैं. इसके तहत यह कार्यक्रम फिर से शीघ्र शुरू किया जाएगा. अभी नीलगाय की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, चिंकारा की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.

अब चीता लाने की तैयारी
नौरादेही अभ्यारण प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा अभ्यारण है. 2018 में यहां पर बाघ पुनरुत्थान प्रोजेक्ट के तहत बाघिन राधा और बाघ किशन को लाया गया था. कुछ समय के बाद इन्हें एक साथ छोड़ दिया गया था. दोनों घुलमिल गए और अब इनकी फैमिली 16 पर पहुंच गई है. वहीं बाघ प्रोजेक्ट सफल होने के बाद यहां पर चीता लाने की भी तैयारी की जा रही है. बाघों के आहार के लिए आने वाले चीतल चीतों की भूख भी मिटाएंगे.

Tags: Mp news, Sagar news, Tiger reserve, Wildlife news in hindi

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Author: Up Head Line

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