वर्ल्ड क्लास कालीन बनाने वाले इन कारीगरों का छलका दर्द, मेहनत और कारीगरी गया के लोगों की और नाम भदोही का

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कुंदन कुमार / गया. उत्तर प्रदेश का एक ज‍िला भदोही है, इसे पूर्वांचल का मैनचेस्टर भी कहा जाता है. भदोही दुन‍ियाभर में अपने कालीन के लिए जाना जाता है. यहां बड़ी संख्‍या में कालीन का न‍िर्माण होता है. जि‍सकी शुरुआत मुगलकाल के दौरान हुई थी. तब से अब तक अपनी इस यात्रा में भदोही के कालीनों ने सफलता के कई मुकाम हास‍िल कर लिए है. लेकिन क्या आपको पता है कि भदोही से देश विदेश मे भेजे जाने वाले कालीन बिहार के गया में तैयार होते है. गया में बड़े पैमाने पर कालीन का निर्माण किया जा रहा है. इसे भदोही भेजा जाता है और वहां जाने के बाद कालीन को देश विदेश में भेजा जाता है.

घर में ही हाथ से कालीन की बिनाई करते है
गया जिला के आमस प्रखंड क्षेत्र मे 50 से अधिक कारीगर कालीन के निर्माण से जुड़े हुए हैं. अपने घर में ही लोग उद्योग लगाकर हाथ से कालीन की बिनाई करते हैं. आमस प्रखंड क्षेत्र के बड़की चिलमी और झरी पंचायत के रेगनियां, नैनागढ़, मठ पर, मरीचा, भगलडीह आदि गांवों के दर्जन भर से अधिक कारीगर बुधौल में पिछले 15 सालों से इस काम को करते आ रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र के सभी कारीगरों ने यूपी के भदोही शहर में इसकी कारीगरी सिखी थी. 2008 से इस क्षेत्र के लोग बड़े पैमाने पर कालीन का निर्माण करते आ रहे हैं.

देश के बड़े शहरों से लेकर विदेशों तक में है मांग

आमस के हूनरमंद कारीगरों के हाथों बनी कलरफूल कालीन जिसे आम भाषा में गलइचा कहा जाता है. जिसकी मांग देश के बड़े शहरों से लेकर विदेशों तक है. इनके बनाए कालीन की ऊंची कीमत लगती है. अपने देश में 5 से 10 और विदेशों में 20 से 25 हजार रुपये में बिकती है. फाइव स्टार होटलों और बड़े इमारतों में प्रयोग की जाती हैं. कालीन बनाने के लिए यहां के कारीगरों को भदोही की कालीन कंपनी के द्वारा कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है. कालीन तैयार होने के बाद इन कारीगरों को इनके परिश्रम का मेहनताना दिया जाता है.

कारीगर विजय रिकियासन और महावीर यादव ने बताया कि यहां अलग-अलग साइज का कालीन बनाया जाता है. एक कालीन बनाने में एक कारीगर को करीब 5-10 दिन लगते हैं. जिसके बदले सिर्फ तीन हजार रुपये ही मिलते है. रोज के 200 से 250 रुपये भी नहीं मिल पाते हैं. कारीगरों ने बताया कि घर-परिवार के बीच रहकर बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्चे निकल जाते हैं. लेकिन इस कमाई से बेटी की ब्याह, घर बनाना और बड़े काम नहीं हो पाते. इन्हें विश्वास है कि सरकारी तौर पर आर्थिक मद्द मिले तो अच्छी कमाई हो सकती है, लेकिन इन्हें पता नहीं कि सरकारी लाभों के लिए किससे और कहां मिलें.

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FIRST PUBLISHED : June 04, 2023, 17:28 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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