बिहार के सभी सदर अस्पताल में जन्म से टेढ़े पैर का होगा इलाज, बच्चों में होती है ‘क्लब फुट’ बीमारी

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सच्चिदानंद/पटना. क्या आपके घर में ऐसा कोई बच्चा है, जिसका पैर जन्म से ही टेढ़ा है या उसे क्लब फुट हो. यदि ऐसा है, तो अब आपको बिहार की राजधानी पटना या अन्य जगह इलाज करवाने की आवश्यकता नहीं होगी. क्योंकि जल्द ही अब राज्य के सभी जिला अस्पतालों में इसका इलाज हो सकेगा. बिहार के सभी सदर अस्पतालों में क्लब फुट क्लीनिक खोले जाने की योजना है. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह की ओर से सभी जिले के सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है.

बता दें कि, अभी राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों के अलावा मात्र एक सदर अस्पताल, हाजीपुर में यह चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध है. मगर जल्द ही फुट क्लीनिक के इलाज की सुविधा सभी जिला अस्पताल में मिलने लगेगी.

सदर अस्पताल में क्लब फुट क्लीनिक खोलने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह की ओर से सभी जिले के सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल पटना, इंदिरा गांधी इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पटना, नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पटना, जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल भागलपुर, दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज गया के अलावा, सदर अस्पताल हाजीपुर में क्लब फुट क्लिनकि संचालित है.

आपके शहर से (पटना)

चूंकि, हाल ही में सभी सदर अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है. इन अस्पतालों में अर्थोपेडिक सर्जन भी बहाल हुए हैं. ऐसे में राज्य के सदर अस्पताल में क्लब फुट क्लिनिक संचालित किए जा सकते हैं. संजय कुमार सिंह ने सभी सिविल सर्जन को कहा है कि वो अपने यहां उपलब्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन की सूची भेजें, ताकि क्लब फुट क्लिनिक खोला जा सके.

क्या है क्लब फुट बीमारी?

बता दें कि, पैर से संबंधित विकृति को क्लब फुट कहा जाता है. इसमें बच्चों के पैर अंदर या बाहर की ओर मुड़े होते हैं. इस वजह से उन्हें चलने-फिरने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. एक या दोनों पैरों में यह समस्या हो सकती है. इससे प्रभावित होने वाले लगभग आधे बच्चों के दोनों पैरों में दिक्कत पाई जाती है. लड़कियों की तुलना में लड़कों को इस तरह की समस्या का खतरा ज्यादा रहता है. क्लब फुट का कारण परिवार के नजदीकी सदस्यों को ऐसी दिक्कत होने पर बच्चों में भी ऐसी आशंका होती है.

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Author: Up Head Line

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