
सौरव पाल/मथुरा. धर्म नगरी मथुरा के वृंदावन में भगवान राधा-कृष्ण की सेवा अनेक प्रकार से होती है. भगवान की फूल बंगला परंपरा भी उनकी भक्तिभाव की देन है. भगवान को गर्मी से बचाने के लिए भक्त ठाकुर जी और उनके मंदिर को सुगंधित फूलों से सजाते है. गर्मी के मौसम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए फूल बंगला परंपरा का जन्म हुआ. इन फूल बंगलों को कुंज निकुंजों का ही रूप माना जाता है. यह ब्रज की स्वतंत्र शिल्प कला है.
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि समय के साथ-साथ इस कला में तकनीक और नए विचारों का प्रवेश हुआ. केले के पत्तों फलों, फूलों के नए प्रयोग से फूल बंगले बनने लगे इस फूल बंगला कला के साथ ही एक नयी कला का जन्म हुआ. जिसे आज कली श्रृंगार के नाम से जाना जाता है. उन्होंने आगे बताया कि जब भक्तों ने अपने आराध्य के विग्रह पूर्ण रूप से फूलों से सजाने का निश्चय किया तो जन्म हुआ है एक नई कला कली श्रृंगार का. कली श्रृंगार में बट के पत्तों के आधार बनाकर टगर, रायबेल,कनेर, मोगरा, आदि की कोमल कलियों से राधा कृष्ण के विभिन्न आभूषणों की तरह तरह की आकृतियां उकेरी जाती है.
फूलों पर विराजमान होकर ठाकुरजी भक्तों को दर्शन देंगे
कली श्रृंगार को बनाने में कम से कम 6 घंटे का समय लगता है. शाम के समय भगवान जब अपने फूल बंगले में विराजमान होते है. तब उन्हे कली से बने पोषक एवं आभूषण पहनाए जाते है उसी को कली श्रृंगार कहा जाता है. इसे देखने के लिए पूरे विश्व से भक्त वृंदावन के मंदिरों में आते हैं. इस श्रृंगार में भगवान के मुकुट,चंद्रिका,माला, काछनी वेणी,कुंडल, कतारे, टिपारा, उपरना,पटुका, अंगियां, साड़ी, कंगन बाजूबंद आदि पारंपरिक वस्त्र और आभूषण शामिल है.
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FIRST PUBLISHED : June 04, 2023, 07:50 IST








