स्वाद का सफ़रनामा: एनर्जी बूस्टर है छुहारा, हवन-पूजन में इस्तेमाल होता है यह सूखा मेवा, दिलचस्प है इसका इतिहास

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हाइलाइट्स

छुहारे में खजूर की अपेक्षा फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है.
छुहारा किडनी में प्लाज्मा क्रिएटिनिन और यूरिया में बढ़ोतरी रोकने में मददगार है.

Swad Ka Safarnama: छुहारा अंतरराष्ट्रीय मेवा (Dry Fruit) है. कभी यह कुछ ही मुल्कों का आहार था लेकिन अब यह अपने गुणों और पौष्टिकता से पूरी दुनिया को प्रभावित किए हुए है. छुहारे को एनर्जी बूस्टर माना जाता है और यह शरीर को परेशान करने वाले वात और पित्त का भी शमन करता है. भारत के तीज-त्योहारों में छुहारे का विशेष महत्व है तो धार्मिक आयोजनों में भी इसकी पूछ है. यह विदेशी मेवा है, लेकिन भारत के कल्चर में घुल-मिल गया है.

दो फलों के बाद बनकर तैयार होता है छुहारा

पहले यह जान लें कि छुहारा (Dry Dates) क्या है. यह असल में खजूर की नमी को सुखाकर बनाया गया मेवा है. जैसे अंगूर को सुखाकर किशमिश बना दी जाती है, उसी प्रकार खजूर में से नमी को सुखाकर छुहारे में बदल दिया जाता है. लेकिन तासीर और गुणों में बदलाव हो जाता है. पेड़ पर उगने से लेकर छुहारा बनने तक यह तीन प्रकार के फलों मे तब्दील होता है. जब खजूर के पेड़ पर फल लगता है और उसका रंग पीला सा होता है, उसे सबसे ताजा और बेहद स्वादिष्ट माना जाता है, लेकिन इसे स्टोर नहीं किया जा सकता, यह जल्द खराब हो जाता है. उसके बाद यह पीले रंग का छोटा फल खजूर में तब्दील होना शुरू हो जाता है.

Dry Dates

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खजूर के मुकाबले छुआरे को लंबे वक्त तक स्टोर किया जा सकता है. Image-Canva

मान लीजिए कि यह फल के रूप में पक गया है. इसे खूब खाया जाता है. जब खजूर को सुखा लिया जाए तो यह छुहारे में बदल जाता है. विशेष बात यह है कि एक ही पेड़ पर पनपे यह तीन तरह के फल स्वाद में अलग-अलग होते हैं. खजूर में नमी 80 प्रतिशत होती है तो छुहारे में यही नमी कम रहकर 10 प्रतिशत रह जाती है. छुहारे की विशेषता यह है कि इसे खजूर से पांच गुना अधिक साल तक स्टोर किया जा सकता है.

उत्पत्ति स्थल पश्चिमी एशिया और अरबिया क्षेत्र

दुनिया भर में खजूर की सैंकड़ों किस्में हैं, लेकिन अधिक यूरोप और पश्चिम देशों में छुहारे की खपत ही बहुत अधिक है. इन देशों के लोगों को छुहारे का सूखापन, सिकुड़ापन, हल्का महसूस होने वाला मीठापन और कुरकुरा स्वाद बेहद भाता है. वहां इसे लोकप्रिय स्नैक्स माना जाता है. छुहारे का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के कृषि विज्ञानी प्रो़ रंजीत सिंह व प्रो़ एसके सक्सेना द्वारा लिखित पुस्तक ‘Fruits’ में माना है छुहारा हजारों वर्षां से खाया जा रहा मेवा है और इसका उत्पत्ति स्थल पश्चिमी एशिया और अरबिया क्षेत्र है.

फूड हिस्टोरियन यह भी मानते हैं कि इसकी खेती 4000 ईसा पूर्व इराक (मेसोपोटामिया) से शुरू हुई थी. वहां के मंदिरों के निर्माण में खजूर के पेड़ का प्रयोग किया जाता था. मिस्र की सभ्यता में भी खजूर का वर्णन है. ढाई हजार वर्ष पूर्व लिखे गए भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में खर्जूरम् का वर्णन है. इसे वात-पित्त में लाभकारी माना जाता है. विशेष बात यह है कि भारत के हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए हिंदू धर्मग्रंथों में छुहारे (तिथय:) का विशेष वर्णन है. पूजा-हवन में इसका उपयोग किया जाता था, तथा प्रसादम के रूप में भी इसके टुकड़े रखे जाते थे. यह परंपरा आज भी जारी है.

खजूर से किस तरह अलग है छुहारा

सवाल यह है कि पौष्टिकता और गुणों के मसले में खजूर और छुहारे में क्या अंतर है. इस मसले पर फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह का कहना है कि ताजे खजूर की बात की जाए तो 100 ग्राम खजूर में कैलोरी की 140 मापी गई है, जबकि इतने ही वजन के छुहारे में कैलोरी की मात्रा बढ़कर 280 हो जाती है. छुहारे में खजूर की अपेक्षा फाइबर की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है. इसी तरह से छुहारे में चीनी का स्तर खजूर से अधिक होता है. विशेष बात यह है कि कोर्बोहाइड्रेट से भरपूर छुहारे में फैट व प्रोटीन का स्तर सामान्य माना जाता है. छुहारे में जिस प्रकार के मिनरल्स व विटामिन्स हैं, उसके चलते यह वजन बढ़ाने में मददगार है.

Dry Dates

छुआरे को एनर्जी बूस्टर भी माना जाता है. Image-Canva

यह एंटीऑक्सीडेंट भी है, जिसके चलते शरीर की कोशिकाएं लगातार स्वस्थ बनी रहती हैं. इसे दुनिया के सबसे पौष्टक पदार्थों में से एक माना जाता है. इसीलिए छुहारे को एनर्जी बूस्टर माना जाता है. रिसर्च यह भी बताती है कि छुहारे में सामान्य डायबिटिज व उसकी जटिलताओं को कम करने की क्षमता है. यह शरीर में पैदा होने वाले ग्लूकोज के स्तर को सोख लेता है, इसलिए शुगर कंट्रोल रहता है.

किडनी के लिए लाभकारी माना जाता है छुहारा

छुहारे में एंटी बैक्टिरियल गुण भी माने जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहयोग देते हैं. यह भी माना जाता है कि छुहारा किडनी में प्लाज्मा क्रिएटिनिन और यूरिया में हो रही बढ़ोतरी को रोकने में मददगार है. एक्सपर्ट मानते हैं कि छुहारे में नेफ्रोप्रोटेक्टिव गुण (किडनी को सुरक्षित रखने वाले तत्व) पाए जाते हैं. छुहारे को सामान्य तौर पर इसकी गुठली निकालकर खाया जा सकता है. अगर इसे चबाने में दिक्कत आ रही है तो आजकल तो यह मिठाई, केक, आइसक्रीम, मिल्कशेक आदि के रूप में भी बाजार में उपलब्ध है. छुहारे को सामान्य तौर पर खाने से कोई साइड इफेक्ट नहीं है. असल में यह अधिक मात्रा में खाया ही नहीं जा सकता, क्योंकि मन और मुंह कुछ देर बाद इसे खाने से इनकार कर देते हैं. अगर इसे ज्यादा खा लिया गया तो यह कब्ज पैदा कर सकता है.

Tags: Food, Lifestyle

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Author: Up Head Line

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