इतिहास में आज: जब चीन में हजारों छात्रों की कर दी गई थी हत्या!

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दुनिया के किसी देश में जब सेना के ओर से दमन चक्र चलता है और उसमें सैकड़ों से हजारों लोगों की जान चली जाती है तो वह घटना इतिहास में शासन के अत्याचार के तौर पर दर्ज हो जाती है. चीन के इतिहास में भी ऐसी ही एक घटना 4 जून 1989 को तियानमेन चौक नरसंहार के रूप में दर्ज है जिसे जून चौथा के नाम से भी जाना जाता है. चीन में लोकतंत्र की बहाली के लिए हो रहे आंदोलन को कुचलने के लिए दुनिया इसे चीन के कम्युनिस्ट शासन की इंतहा के तौर पर याद करती है. इसे आज भी चीन के लिए एक काला धब्बा माना जाता है. इसे जून चौथे आंदोलन, या 89 लोकतंत्र आंदोलन के नाम से भी याद किया जाता है.

पहले से बढ़ रही थी बेचैनी
इस घटना के कारण और बीज चीन के शासक माओ जेडोंग की 1976 में मौत के बाद  के समय चीन में पैदा हुई अस्थिरता में छिपे हुए हैं. 1980 के दशक के उत्तरार्द्ध में चीन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव के लिए चीन के लोगों में बेचैनी बहुत बढ़ गई थी. पिछले कुछ सालों से चीन में लागू किए आर्थिक सुधारों का केवल कुछ ही लोगों को लाभ मिला और अधिकांश को गंभीर नुकसान हुआ.

एक नहीं बहुत सी थीं वजहें
इस सब की वजह से चीन के लोगों में वहां के एकलपार्टी के तंत्र के खिलाफ रोष पनपने लगा. इसे महंगाई, भ्रष्टाचार, नई व्यवस्था के लिए तैयार कुशल लोगों की कमी और राजनैतिक प्रतिबंधों ने और हवा देने का काम किया. नतीजा यह हुआ कि संवैधानिक सुधार, लोकतंत्र, प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लोग और खास तौर से छात्र विरोध प्रदर्शन पर उतर आए.

एक पूर्व महासचिव की मौत
इसी दौरान 15 अप्रैल 1989 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सुधार का समर्थन करने वाले महासचिव रहे हू याओबैंग की मौत हो गई. और इसके बाद देश भर के शहरों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन बढ़ने लगे. 21 अप्रैल को याओबैंग के अंतिम संस्कार से एक दिन पहले भी बीजींग के तियानमेंन चौक पर एक लाख छात्र जमा हो गए थे. देश भर में छात्र लामबंद होने लगे लेकिन सरकार भी खुल कर फैसला नहीं ले पा रही थी. मई में विरोध व्यापक होने लगा था.

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तियानमेन चौक को देखकर आज भी चीनी लोग उस भयावह हादसे को याद करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

मार्शल लॉ लगाने के बाद हटाया
20 मई की चीनी सरकार ने आखिर देश के अधिकांश हिस्सों में मार्शल लॉ लगा दिया. ढाई लाख सैनिक तो अकेले बीजिंग में तैनात किए गए. सैनिकों ने छात्रों को पूरी तरह से घेरा लेकिन उन्होंने सैनिकों से उनका साथ देने की अपील की और सैनिकों को खाना भी दिया. इसके बाद 24 मई को सैनिकों को बिना कोई कार्रवाई किए ही वापस बुला लिया गया.

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एक रिपोर्ट और सरकार पर बढ़ता दबाव
फिर छात्र नेताओं में ही आंदोलन को आगे बढ़ाने में कुछ मतभेद दिखे, लेकिन छात्र फिर भी बड़ी संख्या में तियानमेन चौक पर जमे रहे. एक जून को चीनी पोलितब्यूरो में एक रिपोर्ट जारी हुई जिसमें आंदोलन को एक बड़ा खतरा बताया गया. कहा जाता है कि इसी रिपोर्ट ने ही सरकार को सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने का बहाना दिया था.और दो जून को सरकार को बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए लगा कि कुछ करना ही होगा. और तीन जून को प्रदर्शनकारियों ने बीजिंग में  शहर में भारी संख्या में हथियारों को आते देखा.

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दुनिया के कई हिस्सों में आज भी तियानमेन चौक नरसंहार का शोक मनाया जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

सैन्य कार्रवाई की योजना
3 जून को शुरू में बिना हथियारों के ही सैनिकों ने छात्रों को हटने को कहा जिसके बाद पत्थरबाजी हुई. शाम को ही सैन्य कार्रवाई करने का फैसला कर लिया गया और रात 9 बजे ऑपरेशन शुरू हो गया. इसमें रात एक बजे तियानमेन चौक पर कार्रवाई शुरू करनी थी और छह बजे तक पूरा चौक साफ करने का लक्ष्य रखा गया. लोगों को शाम को ही टेलीविजन द्वारा घर के अंदर रहने की चेतावनी दे दी गई थी.

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3 जून की रात 10 बजे के बाद से ही बीजिंग में हवाई फायरों के साथ सेना तियानमेन चौक की ओर बढ़ने लगी. 12 बजे से पहले ही अलग अलग जगहों पर संघर्ष  हो रहा था. रात 12.15 पर चौक पर पहला हवाई फायर हुआ और 1.30 बजे सेना की टुकड़ी ने दूसरी तरफ से चौक में प्रवेश तक  कुछ देर तक गोलीबारी की. सेना और आंदोलनकारियों में बातचीत भी हुई और शांति से जाने की बातें भी हुईं. कुछ लोग चौक छोड़ कर गए तो कुछ ने रुकने का फैसला किया. कुछ समय बाद फिर से सेना की ओर से चेतावनी का दौर चला और फिर संघर्ष और गोलीबारी हुई. सुबह छात्रों ने चौक तो खाली कर दी,लेकिनफिर हजारों लोग चौक की ओर आने लगे और सेना की टुकड़ी ने फिर गोली बारी कर हमला कर दिया. और इस बार सेना ने रहम नहीं किया और भागते हुए लोगों की पीठ पर गोलियां मारी. बताया जाता है कि इस पूरे घटनाक्रम करीब 10 हजार लोग मारे गए थे. लेकिन सही संख्या की पुष्टि आज तक नहीं हो सकी.

Tags: China, Research, World

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Author: Up Head Line

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