
कुंदन कुमार/गया. जिले में इस वर्ष धान की सीधी बुआई पर जोर दिया जा रहा है. यहां के कृषि वैज्ञानिकों ने भी कृषि विभाग और जिला प्रशासन को इस विधि से धान की रोपाई को लेकर तैयारी करने को कहा है, ताकि किसानों की लागत कम हो सके. धान की सीधी बुआई एक ऐसी तकनीक है. जिसमें धान के पौधे को बिना नर्सरी तैयार किए हुए डायरेक्ट खेत में लगाया जाता है. इस प्रोसेस में धान की रोपाई की आवश्यकता नहीं होती है. सबसे खास बात यह है कि किसानों को धान की रोपाई में आने वाले खर्च और श्रम दोनों की बचत होती है.
6000 रुपया प्रति एकड़ और 30% पानी की होगी बचत
जहां पहले किसान परंपरागत तरीके से जहां धान की रोपाई करते हैं, उससे पहले वह नर्सरी तैयार करते है. इन नर्सरी में बीजों को बोया जाता है और पौधों को उगाया जाता है. 25-35 दिनों के बाद इन पौधों को उखाड़ कर खेत में बो दिया जाता है. धान की सीधी बुवाई तकनीक से लागत में 6000 रुपये प्रति एकड़ की कमी आती है. इस विधि में 30% कम पानी का उपयोग होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि रोपाई के दौरान 4-5 सेंटीमीटर पानी की गहराई को बनाए रखते हुए खेत को लगभग रोजाना सिंचित करना पड़ता है.
समय पर नर्सरी तैयार, जल की व्यवस्था जरुरी
आमस कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ प्रवीण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि रोपण विधि से धान का उत्पादन करनें के लिए एक निर्धारित समय पर नर्सरी तैयार होती है. साथ ही खेतों में जल की समुचित व्यवस्था करना और खेतों की जुताई करना आवश्यक होता है. जिससे धान के उत्पादन की लागत बढ़ जाती है. ऐसे में यदि समय से बारिश न होना या नहरों का पानी न मिलनें से धान के पौध रोपण करने में विलम्ब हो जाता है.
गया के किसानों के लिए वरदान साबित होगा
धान के पौधे के रोपण के लिए निरंतर खेत की जुताई करने से मिट्टी की भौतिक स्थिति काफी ख़राब हो जाती है, जो रबी मौसम की फसलों के लिए उपयुक्त नहीं होता है. साथ ही फसलों के उत्पादन में काफी कमीं आ जाती है. निरंतर धान-गेहूं फसल चक्र अपनाने से खेत की फिजिकल कंडीशन काफी ख़राब हो जाती है.
ऐसे में धान की सीधी बुवाई तकनीक अपनाकर विभिन्न प्रकार की समस्याओं को कम किया जा सकता है. उच्च मात्रा में उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. गया जैसे जिले मे यह तकनिक किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है. यहां अधिकांश जगहों पर कम बारिश होती है. ऐसे में गया के किसान इस तकनीक को अपनाते हैं तो उनकी लागत में बचत और उत्पादन भी बेहतर होगा.
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FIRST PUBLISHED : June 03, 2023, 20:26 IST








