महिला बोली- ऐसा लग रहा था जैसे पिछले जन्म में बेटी ही मेरी मां थी, जानें क्या है कहानी

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सच्चिदानन्द/पटना. ‘मेरी नींद उसकी नींद है, मेरी नींद से मेरी बेटी सोती है मेरी नींद से मेरी बेटी जगती है’. अपनी बेटी के लिए ऐसा कहना है थर्ड स्टेज ओवरी कैंसर पर जीत हासिल करने वाली एक मां की. दरअसल, कैंसर सर्वाइवर्स डे के मौके पर पटना के मेदांता अस्पताल में एक विशेष कार्यक्रम रखा गया, जिसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर जीत हासिल करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. साथ ही मेदांता के सभी कैंसर विशेषज्ञों और मरीजों ने सालों तक चले इस लड़ाई में अपने अनुभव को साझा किया.

उन लोगों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि कैंसर अब लाइलाज नहीं है, बल्कि दूसरी बीमारियों की तरह इसपर भी जीत हासिल की जा सकती है. इस मौके पर पटना स्थित मेदांता में इलाज करवाने वाले लोगों ने अपने-अपने डॉक्टर को थैंक यू भी कहा और नई जिंदगी देने के लिए आभार व्यक्त किया.

साए की तरह साथ रही बेटी
ओवरी कैंसर पर जीत हासिल करने वाली एक मां बताती है कि जब मालूम चला कि मुझे थर्ड स्टेज का ओवरी कैंसर है, तो यह सुनते ही अपनी परवाह से ज्यादा मुझे अपनी बेटियों की भविष्य की चिंता सताने लगी. लेकिन मेरी बेटियों ने ही मुझे संभाला और आज मैं अगर जिंदा हूं, तो डॉक्टर के साथ मेरी बेटी का भी योगदान है.

वे कहती हैं कि इलाज के दौरान मेरी छोटी साए की तरह मेरे साथ रहती थी. नया जीवन देने के लिए जितना डॉक्टर का एहसानमंद हूं, उतना ही अपनी बेटी का भी हूं. करीब डेढ़ से दो साल तक चली इस लड़ाई में मेरी बेटी हमेशा मेरे साथ रही.

इलाज के दौरान ऐसा लग रहा था की शायद पिछले जन्म में बेटी ही मेरी मां रही होगी. मेरे कर्म अच्छे होंगे की मुझे बेटियों के रूप में ऐसी संतान मिली, जिन्होंने कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं किसी बीमारी से लड़ रही हूं. पटना स्थित मेदांता के डॉक्टर अमित की देखरेख में मेरा इलाज हुआ.

70 साल की मां को हो गया था ब्रेस्ट कैंसर
पटना के रहने वाले अभिषेक चटर्जी बताते हैं कि 2022 में जब पहली बार मालूम चला कि मेरी मां को ब्रेस्ट कैंसर है, उस समय आंखों के सामने पूरा अंधेरा छा गया. समझ नहीं आ रहा था की अब क्या करूं. माताजी के 70 के करीब उम्र की वजह से मन में डर था, लेकिन इनकी हिम्मत को देख कर मेरे अंदर भी हिम्मत आया और डॉक्टर अमित और बाकि डॉक्टरों की देखरेख इलाज चला. करीब 28 कीमो चलने के बाद अब माताजी पूरी तरह से ठीक हैं. माताजी बताती हैं कि मुझे लगा कि मेरे बाद बेटे का क्या होगा. इसलिए इसका साहस ना टूटे इसके लिए मुझे भी खुद को हिम्मत देना पड़ा.

‘कैंसर को समझें नॉर्मल बुखार’
ब्रेन ट्यूमर से लड़ने वाले प्रभास कुमार अग्रवाल बताते हैं कि 2020 में चल नहीं पाते थे. पूरा शरीर लकवा ग्रसित हो गया था. डॉक्टर से दिखाने के बाद पता चला कि मेरे ब्रेन में ट्यूमर है. डॉक्टर अमित की देखरेख में इलाज और सर्जरी हुआ और अब थोड़ा बहुत चल लेता हूं. बाकी मरीजों को सीख देते हुए प्रभास कहते हैं कि अपने दिमाग में यह कभी मत लाइए की आपको कैंसर है. इसको नॉर्मल बुखार की तरह माने. समझें कि डॉक्टर दवाई देगा और ठीक हो जाएगा. हमेशा पॉजिटिव रहिए.

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FIRST PUBLISHED : June 03, 2023, 17:51 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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