
हाइलाइट्स
शुक्रवार को शाम 6.50 बजे से 7.10 बजे के बीच ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों के बीच दो टक्कर हुई.
इस दुर्घटना में कई डिब्बे एक दूसरे के ऊपर आ गए.
सवाल यह उठ रहा है कि यह तकनीकी खराबी थी या मानवीय भूल?
नई दिल्ली: कल शाम ओडिशा में तीन ट्रेनों के दुर्घटनाग्रस्त (Odisha Train Accident) होने के बाद अब तक 288 लोगों की मौत हो गई. इस घटना को लेकर कई संभावित सवाल उठाए जा रहे हैं जो शायद इस त्रासदी में भूमिका निभाई हो सकती हैं. शुक्रवार को शाम 6.50 बजे से 7.10 बजे के बीच ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों के बीच दो टक्कर हुई, जिससे कई डिब्बे एक दुसरे के ऊपर आ गए.
NDTV के अनुसार एक यात्री ट्रेन, कोरोमंडल शालीमार एक्सप्रेस, एक खड़ी मालगाड़ी से टकराने के बाद पटरी से उतर गई और एक अन्य ट्रेन, यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट, पटरी से उतरे डिब्बों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि पटरियों पर गिरने से पहले डिब्बे हवा में ऊंचे उठ गए. एक कोच उसकी छत पर जा गिरा. दोनों ट्रेनों के 17 डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए.
रेल मंत्रालय ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं. बैक-टू-बैक दुर्घटनाएं कैसे हुईं, इसके एक से अधिक संस्करण हैं, लेकिन यह निश्चित है कि एक ही स्थान पर तीन ट्रेनें और दो टक्करें हुईं. दुर्घटना को लेकर कई सवालों के बीच यह है कि कोरोमंडल शालीमार एक्सप्रेस स्थिर मालगाड़ी के समान ट्रैक पर कैसे थी. यह तकनीकी खराबी थी या मानवीय भूल? कई ने सिग्नल त्रुटि की संभावना जताई है.
मालूम हो कि रेल मंत्रालय देश भर में एक टक्कर रोधी टेक्नोलॉजी ‘कवच’ स्थापित करने की प्रक्रिया में है. कवच अलर्ट करता है जब एक ट्रेन सिग्नल को पार करती है (सिग्नल पास एट डेंजर – SPAD), जो ट्रेन टक्करों का प्रमुख कारण है. यह टेक्नोलॉजी ट्रेन के ड्राइवर को सतर्क कर सकता है, ब्रेक को नियंत्रित कर सकता है और उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन को नोटिस करने पर ट्रेन को रोक सकता है. कोरोमंडल एक्सप्रेस के सबसे अधिक प्रभावित हिस्से स्लीपर क्लास के डिब्बे थे, जो आमतौर पर छुट्टियों के दौरान भरे हुए होते हैं. यहां तक कि गैर-आरक्षित यात्री भी अंदर जाते हैं.
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Tags: Odisha, Train accident
FIRST PUBLISHED : June 03, 2023, 13:25 IST








