
जुगल कलाल/ डूंगरपुर. राजस्थान के डूंगरपुर में बड़ा ख़ास शिवलिंग है. ख़ास इसलिए भी क्योंकि आपने इस तरह के शिवलिंग के बारे में ना कही सुना होगा और ना आपने देखा होगा. इस तरह के शिवलिंग का यह इकलौता ऐसा महादेव मंदिर है. जहां पर शिवलिंग नंदी पर विराजित है. यहीं नहीं इसी नंदी पर पूरा शिव परिवार समेत ब्रह्मा, विष्णु, और देवी-देवताओं की आकृति भी है. नंदी के पूंछ के ऊपर के भाग को केदार कहते है. इसलिए इस मंदिर को केदारेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है.
नंदी पर विराजित है पूरा शिव परिवार
डूंगरपुर मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित है छापी गांव और यहां है केदारेश्वर महादेव मंदिर. यहां पर देवी देवता नंदी पर है. यह नंदी अपने आप में अद्भुत है. कहा जाता है कि 700 साल पहले गांव में कुएं की खुदाई के दौरान 10 से 15 फीट तक जाने पर औजार के किसी पत्थर से टकराने की आवाज आई. खुदाई राेक कर मिट्टी हटाई ताे नंदी मिले. अभी उसी स्थान पर मंदिर है. वहां से 200 मीटर की दूर नंदी पर विराजित शिवलिंग वाली प्रतिमा निकली. इस पर पूरा शिव परिवार है. नंदी के पूंछ के ऊपर के भाग काे केदार कहते हैं. नंदी पर शिवलिंग स्थापित हाेने के कारण इस मंदिर का नाम केदारेश्वर रखा गया.
इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि इस नंदी पर विराजित शिवलिंग काे अन्य स्थान पर ले जाने का प्रयास किया तो इसके लिए बनाए गए वाहन भी टूट गए. इसके बाद बैलगाड़ी में रख कर जब ले जाया जा रहा था तो 200 मीटर से आगे नंदी पर विराजित शिवलिंग नहीं जा सके. इसके बाद यहीं पर केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किया. नंदी के एक कान पर कार्तिकेय व गणेश भगवान है. नागपाश की जनेऊ है.
बाहुबली भीम करते थे इस शिवलिंग की पूजा
छापी गांव के रहने वाले शिक्षक नयनेश व्यास बताते है कि 700 साल पहले खुदाई के वक्त निकले इस अद्भुत शिवलिंग को लेकर कहा जाता है कि जब पांडव अपने एक साल के अज्ञातवास के समय छापी गांव में रुके थे. तब भीम अपने झोले में 30-40 किलो का शिवलिंग साथ लेकर चलते थे. उस समय भीम रोजाना इस शिवलिंग की पूजा किया करते थे. जब पांडव यहां से आगे की ओर बड़े तब भीम ने शिवलीग को यहां पर विराजित कर दिया. केदारश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग का दर्शन करने के लिए लोग भारी संख्या में आते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 02, 2023, 21:40 IST








