आधुनिक दुनिया में क्यों बढ़ रही गुलामी, उत्तर कोरिया में सबसे ज्यादा, भारत भी अछूता नहीं

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हाइलाइट्स

वैश्विक दासता सूचकांक 2023 के अनुसार, अनुमानित 50 मिलियन लोग
विश्व में प्रत्येक 160 में से एक व्यक्ति आधुनिक दासता का शिकार है
आंकड़ों के अनुसार भारत में 1000 लोगों में 08 दासता के शिकार

हाल ही में द ग्लोबल स्लेवरी इंडैक्स 2023 यानि वैश्विक दासता सूचकांक आया है, जो कहता है कि दुनियाभर में 05 करोड़ लोगों की हालत गुलामों सरीखी है. इसे मॉडर्न स्लेवरी कहा जा सकता है. इसमें लोग गुलामों की तरह से नौकरियां कर रहे हैं. मशीन बन गए हैं. पिछले 05 सालों में इस स्थिति में 25 फीसदी इजाफा हुआ है.

नई रिपोर्ट कहती है कि भारत समेत जी20 के देश इससे अछूते नहीं हैं बल्कि इस तरह से मानवीय सभ्यता को गुलाम बनाने में अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं. जी20 देशों में सूची में भारत शीर्ष पर है. जहां 1.1 करोड़ लोगों की स्थिति बंधुआ मजदूरों सरीखी है. इसके बाद चीन, रूस, इंडोनेशिया और तुर्की जैसे देश हैं

लेकिन वैश्विक स्तर पर बात करें तो सबसे खराब हालत उत्तर कोरिया है. जो द ग्लोबल स्लेवरी इंडैक्स में सबसे टॉप पर है. वहां अगर 1000 लोगों को पैमाना माना जाए तो मॉडर्न स्लेवरी की दर 100 से ऊपर की है. सबसे बेहतर स्थिति में यूरोपीय देश हैं. जहां ये स्थितियां बहुत कम हैं.

ये दुनिया की स्याह तस्वीर दिखाता है
राइट्स ग्रुप वाक फ्री फाउंडेशन ने मई के आखिरी हफ्ते में 160 देशों की ग्लोबल स्लेवरी लिस्ट जारी की. इसमें इस संगठन ने इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन (आईएलओ) , वाक फ्री और इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों की मदद ली. ये इंडैक्स हमारी उस दुनिया की स्याह तस्वीर दिखाता है कि हमारी तरक्की मनुष्यों को बेहतर जिंदगी देने की बजाए गुलाम बना रहा है.

रिपोर्ट कहती है कि जी20 देशों ने अपनी व्यापार गतिविधियों और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के जरिए इस संकट को बढाया है. अगर इस रिपोर्ट के आंकड़ों को मानें तो लगता है कि असमानता की खाई गहरी हो रही है.

कैसे बढ़ रही है आधुनिक दासता
आधुनिक दासता में शोषण तमाम तरह से हो रहा है. जिसमें जबरन श्रम, जबरन विवाह, ऋण बंधन, व्यावसायिक यौन शोषण, मानव तस्करी, गुलामी जैसी प्रथाएं और बच्चों की बिक्री एवं शोषण शामिल हैं. ये कुल मिलाकर मनुष्यता के लिए घातक है. मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है, मानवीय गरिमा को कम करती है और सामाजिक एकजुटता को नष्ट करती है.

05 सालों में ये बेतहाशा बढ़ी
यह आर्थिक विकास को भी बाधित करती है, असमानता को बनाए रखती है. भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है. ये संघर्ष, आतंकवाद एवं संगठित अपराध को भी बढ़ावा देकर वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिये खतरा पैदा करती है.अगर पिछले पांच साल में आधुनिक दासता की बढ़ती संख्या पर गौर करें तो ये संख्या काफी ज्यादा बढ़ी है. कहा जा सकता है फिलहाल दुनिया में हर 160 में एक व्यक्ति आधुनिक दासता का शिकार है.

सबसे ज्यादा खराब हालत उत्तर कोरिया की
सबसे ज्यादा ये स्थिति उत्तर कोरिया (104.6), इरिट्रिया (93) तथा मौरतानिया (79) में खराब है, जहां आधुनिक दासता काफी ज्यादा है और सरकार की ओर से भी इस पर रजामंदी लगती है. सबसे कम प्रचलन वाले देशों में यूरोपीय देश हैं.  उसके अलावा न्यूजीलैंड भी, जहां मज़बूत शासन और नीतियां इस तरह के हालात को कम करते हैं. आधुनिक दासता में एशिया और प्रशांत के लोगों की संख्या सबसे अधिक है (29.3 मिलियन).

भारत में 1000 में 8 लोग दासता के घेरे में
भारत में इसकी दर 1000 में 08 लोगों की है. जिन देशों में हालत खऱाब है, उसमें तमाम वजहें तो हैं लेकिन मुख्य राजनीतिक अस्थिरता, असमानता, बुनियादी ज़रूरतों की कमी, आपराधिक न्याय तंत्र, आंतरिक संघर्ष और विस्थापन जैसे कारण हैं, जो लोगों को आधुनिक गुलाम बना रहे हैं.

Tags: Labour Law, Migrant labour, Slave

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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