दर्द सहना है तो शीरीरिक तौर पर ज्यादा सक्रिय रहिए, शोध किया सिद्ध

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खेल और सैन्य सहित कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां इंसान की शारीरिक क्षमता के साथ दर्द सहने की क्षमता का भी बहुत महत्व होता है. बरसों से विशेषज्ञ यह मानते आ रहे थे कि शारीरिक गतिविधियों की आदत लंबे समय के दर्द को रोकने और उसके प्रबंधन में मददगार हो सकती है क्योंकि इससे दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है. लेकिन कई अध्ययन होने के बाद भी इस विषय पर कोई प्रमाणिक नतीजे स्थापित नहीं हो सके थे.10 हजार वयस्कों के आकंड़ों वाले नए अध्ययन में शारीरिक गतिविधि और ज्यादा दर्द सहने की क्षमता के बीच गहरे संबंध का खुलासा हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

PLOS वन में प्रकाशित अध्ययन में यूट्रोमोसो के निवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ नॉर्थ नॉर्वे के एंडर्स एर्नेस और उनकी टीम के गहन शोध ने इस बात की पुष्टि की है कि ज्यादा सक्रिय जीवनशैली में गहरे और लंबे दर्द से निपटने की ज्यादा क्षमता होती है. एर्नेस और उनकी टीम ने पुराने अध्ययनों की छोटे आकार और खास जनसंख्या पर ध्यान केंद्रित करने की सीमाओं का ध्यान रखा और दर्द सहने और शारीरिक गतिविधि के बीच संबंध में ज्यादा व्यापक स्पष्टता लाने का प्रयास किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay शोधकर्ताओं ने इसके लिए ट्रोमसो स्टडी में भाग लेने वाले 10732 नॉर्वे वयस्कों से आंकड़े हासिल किए. ट्रोमसो स्टडी समय समय पर नॉर्वे के विशाल जनसंख्या में किया जाने वाला सर्वे होता है. शोधकर्ताओं ने सर्वे के दो चरणों में जमा किए गए आंकड़ों का उपयोग किया जो कि 2007 से 2008 और 2015 से 2016 के बीच लिए गए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock) आंकड़ों से शोधकर्ताओं को प्रतिभागियों के द्वारा बताए गए शारीरिक गतिविधियों के स्तरों और उनकी दर्द सहने की क्षमता के बारे में जानकारी मिल सकी. हर प्रतिभागी के दर्द सहन करने की क्षमता एक खास टेस्ट से आंकी गई जिसमें उन्हें अपना हाथ ठंडे पानी में डुबोना था जिसका तुलनात्म मापन किया भी किया जा सकता था. दोनों ही चरणों के आंकड़ों के विश्लेषण में सक्रिय जीवनशैली वाले प्रतिभागियों में दर्द सहने की ज्यादा शक्ति पाई गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) दोनों ही चरणों में जिन लोगों में ज्यादा सक्रियता स्तर थे उनमें ज्यादा दर्द सहनशीलता देखी गई. यहां तक कि जिन प्रतिभागियों ने 2007/2008 की तुलना में 2015/2016 के चरण में ज्यादा शारीरिक सक्रियता बताई उनके भी दर्द सहन की क्षमता में इजाफा पाया गया. रोचक तौर से शोध में सक्रियता के स्तरों और दर्द सहनशीलता में बदलावों के बीच संबंध के बारे में कुछ नहीं बताया गया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) लेकिन यह भी सुझाया गया है कि शरीरिक गतिविधि या सक्रियता को काम रखना, एक नियमित रूटीन बनाना और यहां तक की शारीरिक सकियता को बढ़ाने का ज्यादा दर्द सहने की क्षमता से साकारात्मक तौर से जुड़े हैं. इन नतीजं के बीच एर्नेस और उनकी टीम का प्रस्ताव है कि शरीरिक सक्रियता को बढ़ावा देना लंबे समय से चले आ रहे दर्दों को कम करने मददगार हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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Author: Up Head Line

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