ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हुआ आसान, परिवहन विभाग ने व्‍यवस्‍था में किया बदलाव, नए नियम के तहत बनेंगे DL

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जयपुर. जयपुर में अब लाइसेंस बनवाना आसान हो गया है. यहां के आरटीओ जोन प्रथम में ड्राइविंग लाइसेंस की बनाने की व्यवस्था में नए बदलाव किए गए हैं. अब ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर लाइसेंस बनाने का काम निजी कंपनी नहीं बल्कि खुद परिवहन विभाग करेगा. परिवहन विभाग ने निजी कंपनी से ट्रैक का पजेशन ले लिया है.

राजधानी जयपुर में जगतपुरा में लाइसेंस बनाने के लिए देश का सबसे आधुनिक ऑटोमेटेड ट्रैक बनाया गया है. इस ट्रैक पर ड्राइवर को टेस्ट देना होता है और उसी के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है. यह ट्रैक स्मार्ट चिप नाम की कंपनी के पास था. इस कंपनी और परिवहन विभाग के बीच 720 दिन यानी लगभग 2 साल का अनुबंध हुआ था. अब यह 720 दिन पूरे हो गए हैं. ऐसे में परिवहन विभाग ने अनुबंध बढ़ाने की बजाय लाइसेंस बनाने का काम अपने हाथों में ले लिया है.

लगातार मिल रही थीं शिकायतें
परिवहन विभाग को लाइसेंस बनाने वालों की लगातार शिकायत मिल रही थी. शिकायत के अनुसार छोटी सी कंप्यूटर त्रुटि की वजह से उनका लाइसेंस रद्द हो रहा था. ऐसे में अब विभाग ने खुद लाइसेंस बनाने का काम ले लिया है. जगतपुरा स्थित एआरटीओ दफ्तर में रोजाना औसतन 250 आवेदकों का ट्रायल होता है. ट्रायल के दौरान यदि कोई तकनीकी खराबी होती है तो, समस्याओं से निपटने के लिए परिवहन विभाग ने कंप्यूटर सेवाओं में एक्सपर्ट विभाग के सूचना सहायकों को लगाया है. 3 परिवहन निरीक्षकों के साथ ही यहां पर 4 सूचना सहायक व्यवस्था संभालेंगे.

परिवहन विभाग के अधिकारी खुद करेंगे निगरानी
गौरतलब है कि यह ट्रैक अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड का बनाया गया है. सारा काम कंप्यूटर की निगरानी से होता है. यदि टेस्ट के दौरान छोटी सी भी लाइन को क्रॉस किया तो कंप्यूटर आवेदक को फेल कर देता है, जबकि व्यवहारिक तौर पर वह लाइसेंस का हकदार होता है. इसके अलावा कंप्यूटर के हैंग होने की स्थिति में प्रक्रिया गड़बड़ हो जाती है, ऐसे में अब परिवहन विभाग के अधिकारी खुद निगरानी करेंगे जिससे आवेदकों को लाइसेंस बनवाने में होने वाली दिक्कतों से राहत मिल सके.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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