
नई दिल्ली. पाकिस्तान की एक अदालत ने ईशनिंदा कानून के तहत युवक को मौत की सजा सुनाई है. साथ ही उसपर चार लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. पाकिस्तान के न्यूज इंटरनेशनल न्यूजपेपर की खबर के अनुसार छह साल पुराने मामले में यह फैसला दिया गया है. इस युवक ने खुद को पैगंबर मोहम्मद बताने की गलती कर दी थी. जिसके चलते पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक अदालत ने यह फैसला सुनाया.
मर्दन शहर के होटी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत गुलीबाग इलाके में स्थित मस्जिद के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर इमरान नामक युवक ने खुद को पैगंबर बताया था. मस्जिद के अंदर तबलीगी जमात के सदस्य मौजूद थे. उन्होंने इस शख्स को पकड़ा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया था.
पाकिस्तान के मर्दन शहर की अदालत में इस पूरे प्रकरण पर मुकदमा चला. आतंकवाद निरोधक अधिनियम के तहत इस शख्स पर कानूनी कार्रवाई हुई. अदालत ने इरफान को सजा-ए-मौत देने के साथ-साथ अन्य धाराओं में 10 साल की सजा भी सुनाई है. नियम अनुसार अदालत द्वारा विभिन्न धाराओं में दी गई सबसे बड़ी सजा ही अपराधी को दी जाती है.
क्या है ईशनिंदा कानून?
ईशनिंदा कानून एक ऐसा कानून है जिसके तहत पाकिस्तान अपने देश के अल्पसंख्यक हिंदू, सिख और ईसाईयों पर अत्याचार करता रहा है. नियम के तहत पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ एक भी शब्द बोले जाने पर आरोपी को सजा-ए-मौत दे दी जाती है. मानवाधिकार संगठन ईशनिंदा कानून को अमानवीय बताते रहे हैं. ये कानून अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करता है. पूरा विश्व इस कानून को लागू करने वाले देशों की आलोचना करता है.
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FIRST PUBLISHED : June 01, 2023, 19:48 IST








