दुनिया का वो सवाल, जिसे पूछने वाला बन जाता है नरभक्षी, जवाब देने वाले की खाई जाती है लाश!

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इंसान ने अपने जिंदा रहने के लिए खाने का जुगाड़ करने की आदत शुरुआत से सीखी है. प्रकृति ने काफी अच्छे तरीके से खाने-पीने की जरुरत पूरा करने के लिए फ़ूड चेन बनाया है. इसमें एक जीव अपने सर्वाइवल के लिए दूसरे जीव पर निर्भर करता है. इंसान हो या कोई जानवर, सब जिंदा रहने के लिए दूसरे पर ही निर्भर करते हैं. लेकिन किसी भी तरह के जीव कभी खुद की प्रजाति के जीवों का शिकार नहीं करते. खासकर इंसानों में कभी दूसरे इंसान के मांस को खाने का रिवाज नहीं रहा है. अगर ऐसा होता है तो उसे नरभक्षी मानकर पकड़ लिया जाता है.

नरभक्षी हमेशा से समाज के लिए खतरा होते हैं. अगर ऐसे किसी के बारे में पता चलता है तो उसे पकड़ कर जेल में डाल दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी स्थिति है, जिसमें अगर इंसान दूसरे इंसान को खा जाए तो भी उसे सजा नहीं दी जा सकती. जी हां, इस नियम को कहीं लिखा तो नहीं गया है लेकिन इसे कहा जाता है ‘द डेलिकेट क्वेस्चन’. जी हां, इस सवाल को पूछने वाला नरभक्षी बन जाता है और इस सवाल का जवाब देने वाले को खा जाता है.

मौत का सवाल
आम तौर पर अगर इंसान को पानी मिलता रहे तो वो एक महीने तक जिंदा रह सकता है. लेकिन जब इंसान समुद्र में या ऐसे वीरान जगह पर फंस जाए जहां पीने के पानी का साधन ना हो तो मौत जल्दी आ जाती है. यूट्यूबर मिस्टर बालन ने हाल ही में डेथ क्वेश्चन के बारे में लोगों को बताया. इसमें समुद्री हादसों में फंसे लोगों का जिक्र था. उन्होंने बीस नवंबर, 1820 में हुए एक हादसे का जिक्र किया. इस हादसे में एक व्हेल ने बड़े से जहाज को डूबा दिया था. इसमें से 20 लोग बच गए और तीन नावों में किनारे के लिए निकल गए. लेकिन उन्हें पता था कि उनके पास इतना खाना नहीं है कि सब बच जाएं. जब खाना खत्म हो गया तब उन्होंने मौत के सवाल की पर्ची बनाई.

कई सालों से चला आ रहा है ट्रेडिशन

ऐसा है नियम
मौत के सवाल का अनोखा नियम है. जब लोग ऐसी स्थिति में फंस कए कि उनके पास खाने के लिए कुछ ना बचे तब लोग चिट के माध्यम से मरने को तैयार होते हैं. इस हादसे में ये तय हुआ कि जिसके पास कुर्बानी का चिट आएगा, उसे मारकर जहाज के बाकी लोग खा जाएंगे. ऐसा ही हुआ भी. हादसे में सिर्फ आठ लोग बचे. सभी को 5 अप्रैल 1821 में बचाया जा सका. चार महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताने के लिए इन लोगों ने बाकी का मांस खा लिया. आज भी इस डेलिकेट क्वेस्चन का नियम बरकरार है. जब ऐसी स्थिति आ जाए कि भूख से मौत हो जाए, तब लोग नरभक्षी बन सकते हैं.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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