World Milk Day 2023 dairy giving nutrition livelihoods while being environmental friendly

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हाइलाइट्स

डेयरी उद्योग दुनिया में कृषि से भी पुराना है.
दूध के फायदे बहुत ज्यादा हैं और उसका विकल्प भी नहीं है.
विश्व दूध दिवस डेयरी उद्योग को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है.

डेयरी उत्पाद एक उद्योग के हिस्से हो चुके हैं. भारत सहित दुनिया भर में डेयरी के उत्पाद उसमें विशेष तौर पर मवेशियों से निकाला जाने वाला दूध आज भी दुनिया के प्रमुख पोषण आहार में गिना जाता है. दुग्ध और उससे संबंधित डेयरी उत्पाद दुनिया भर में अपना एक अहम स्थान रखते हैं और आज खाद्य आपूर्ति की कल्पना इस उद्योग के बिना की ही नहीं जा सकती है. हर साल एक जून को मनाया जाना वाले विश्व दुग्ध दिवस के मौके पर साल 2023 में खाद्य एवं कृषि संगठन और उसकी सहयोगी संस्थाएं इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगी कि कैसे डेयरी क्षेत्र लोगों को पोषक भोजन और आजीविका प्रदान करते हुए पर्यावरण के फुटप्रिंट कम कर रहा है.

क्या है मकसद
विश्व दुग्ध दिवस को संयुक्त राष्ट्र संगठन की उपसंस्था खाद्य एवं कृषि संगठन साल 2001 से मनाता आ रहा है. इस दिन को मनाने का मकसद दूध के वैश्विक खाद्य के तौर पर महत्व पहचाना जाए इसके लिए प्रयास करना है. इसके साथ ही डेयरी क्षेत्र की अहमियत के प्रति लोगों को जागरूक करना है.

एक अरब लोगों की आजीवीका
तभी से हर साल लोगों को दूध और डेयरी उत्पादन की दुनिया भर में प्रोत्साहित करने की कोशिश की जाती है जिससे यह उद्योग करीब एक अरब लोगों की आजीविका का सहारा है. उद्देश्य एकसाथ ऐसा नैरेटिव बनाना है जो इस क्षेत्र में पर्यावरण, पोषण और सामाजिक प्रभाव को समाहित करने का काम करे.

डेयरी क्षेत्र से जोड़ना
डेयरी क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों पर ध्यान दिलाने के अवसर के तौर पर मनाया जाता है. इस मौके पर कई तरह के आयोजनों के जरिए लोगों को दूध के महत्व के प्रति जागरूक किया जाता है. यह दिवस एक मौका जिससे लोगों का डेयरी क्षेत्र पर ध्यान खींचा जा सके और उन्हें इस क्षेत्र से जोड़ा जा सके.

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डेयरी उद्योग के लाभ बहुत ज्यादा है और लोगों को इनके प्रति जागरूक होने की जरूरत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

एक वृहद योगदान
डेयरी क्षेत्र के योगदान को आमतौर पर वह पहचान नहीं मिलती जिसका वह हकदार है. यह क्षेत्र अच्छा भोजन, सेहत और पोषण में योगदान देता है. किसान अपने समुदायों, जमीन और अन्य जानवरों की रक्षा करते हैं. इस पूरे क्षेत्र का एक पारिस्थितिकी तंत्र है जो पर्यावरण से लेकर आर्थिक विकास तक में योगदान देने का काम करता है.

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समस्याएं और बाधाएं भी
लेकिन डेयरी क्षेत्र के लिए ये योगदान कई तरह की समस्याएं और बाधाएं भी लेकर आते हैं. एक तरफ दुनिया भर के मवेशी पालन का मीथेन उत्सर्जन में बढ़ता योगदान चिंता का विषय होता जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ मवेशियों का लालन पालन  कई तरह के पर्यावरणीय चुनौतियां भी लाता है, जिसमें घास के मैदानों के खात्मे से लेकर पेड़ पौधों तक नुकसान तक शामिल हैं.

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डेयरी उद्योग के नुकसान खतरनाक स्तर के हो सकते हैं. लेकिन उसके फायदे बहुत ज्यादा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

कोई विकल्प ही नहीं
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यह क्षेत्र या उद्योग ही सही नहीं है. दरअसल इस उद्योग का कोई विकल्प नहीं है और अन्य खाद्य उद्योगों की तुलना में यह ज्यादा जलवायु अनुकूल है. जिस तरह का पोषण दूध और डेयरी आहार देते हैं उसका कोई विकल्प नहीं हैं. यह सबसे पुराना उद्योग है. यहां तक कि कृषि से भी पुराना है.

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दुग्ध उत्पादन और पशुपालन बेशक बहुत पुराना उद्योग है. लेकिन आज यह आधुनिक जीवन शौली और विकास कार्यों के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी का सामना कर रह है. बढ़ती मांग के साथ इसकी समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं जिसमें मवेशियां द्वारा मीथेन उत्सर्जन एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. फिर भी दूध के हड्डियों को मजबूत करने, मांसपेशियों की वृद्धि, पोषण जैसे कई फायदे इन समस्याओं के समाधान खोजने के प्रयास के लिए ही प्रेरित करने का काम करते हैं.

Tags: Environment, Research, Science, United nations, World

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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