
प्रतापा राम/जैसलमेर. मखमली रेत के टीलों में बसे राजस्थान के जैसलमेर को सोने का शहर कहें या अतीत की दबी कहानियों का शहर कहा जाता है. यहां हजारों वीरता, पराक्रम, प्रेम और दैवीय शक्तियों की कहानियां दफन हैं. महेंद्र मूमल की प्रेम गाथा हो या राजाओं की वीरता या मां आवड़ और मांं स्वांगिया की दैवीय शक्तियां कई गाथाएं यहां मौजूद हैं. जैसलमेर से 50 किलोमीटर दूर रासला सांवता गांव की देगराय ओरण में स्थित चमत्कारिक व अद्भुत दैवीय शक्तियों के लिए जाना जाता है.
जैसलमेर जिले में अलग-अलग जगहों पर देवियों के शक्ति पीठ विराजमान है. कहा जाता है कि ये मंदिर मां देगराय व उनकी छ: बहनों का है जो जैसलमेर और भक्तों की रक्षा करते हैं. जिसमें सातों बहनों की चमत्कारिक शक्तियों के किस्से कहानियां मशहूर हैतनोट राय, घंटियाली राय, भादरिया राय, देगराय, तेम्बडेराय, काले डूंगराय व स्वांगिया राय ये सातों बहनें थी.
देगराय मंदिर जैसलमेर के पूर्व में 50 किलोमीटर दूर रासला सांवता गांव में देगराय जलाशय पर स्थित है. महारावल अखैसिह ने इस नवीन मंदिर का निर्माण करवाया था. देवियों ने भैंसे के रुप में महिष नामक विचरण कर रहे दैत्य को मारकर उसी के सिर का देग बनाकर उससे रक्तपान किया. जिसके बाद और भी कई चमत्कारिक शक्तियों को देखकर लोगों ने देगराय मां की पूजा करनी शुरू कर दी.
स्थानीय लोगों व मंदिर के पुजारी ने बताया कि पहले यहां पर होने वाले चमत्कारों के कारण लोग रात में रुक नही सकते थे.यहां रात को नगाड़ों व घुघरुओं की ध्वनि सुनाई देती है. कभी-कभी दीपक स्वतः ही प्रज्ज्वलित हो जाता है व व कभी सिंह की गर्जना होती है.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 12:57 IST








