
देहरादून/नैनीताल. बाघों का सबसे अधिक घनत्व वाले कार्बेट टाइगर रिजर्व में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है. पेट में धंसे तार के फंदे के साथ मिली बाघिन इस बात को पुख्ता करती है कि कार्बेट अब भी शिकारियों के निशाने पर है. 2016 में हरिद्वार पुलिस ने बाघ की पांच खाल और 130 किलो हडडियों के साथ बावरिया गिरोह को पकड़ा था. जांच में पता चला था कि इसमें से दो बाघ कार्बेट में मारे गए थे. वन मंत्री सुबोध उनियाल ने चिंता जताते हुए इस पर एक्शन की बात कही है.
प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक ने बताया कि वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में पिछले बाईस सालों में 22 गुलदार शिकारियों की भेंट चढ़ गए. इन बाईस सालों में छह बाघ और नौ टस्कर हाथी भी शिकारियों ने मार डाले. राजाजी टाइगर रिजर्व में भी 2018 में गुलदार और बाघ की खाल और हडडियां मिली थीं. 2022 में राजाजी की मोतीचूर रेंज से गायब हुई बाघिन टी-वन का तो आज तक पता नहीं लगा.
कार्बेट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में डीएफओ रह चुके रिटायर्ड आईएफएस नरेंद्र सिंह का कहना है कि ये क्षेत्र हमेशा से ही शिकारियों के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं. शिकारियों पर लगाम लगानी है तो विभाग को अब पंरपरागत तरीके छोड़ आधुनिक तकनीक का प्रयोग करना होगा. ग्राउंड पेट्रोलिंग और इंटलीजेंस भी मजबूत होनी चाहिए.
कार्बेट टाइगर रिजर्व हो या फिर राजाजी टाइगर रिजर्व में होने वाली घटनाएं आम तौर पर सामने नहीं आ पातीं, वरना वाइल्ड लाइफ के शिकार की दर्जनों घटनाएं बीते सालों में हुई है. ताजा प्रकरण बताता है कि जानवरों के अवैध शिकार का सिलसिला अभी थमा नहीं है.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 12:41 IST









